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चंबा प्रशासन का कारनामा: अपनों से वसूले पैसे, बाहरी राज्यों के कारोबारियों को मुफ्त में बांटे 10 स्टॉल
Wed, 12 Aug 2020 10:50 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, चंबा/शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, चंबा/शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 12 Aug 2020 10:50 AM IST
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मिंजर मेले में लगे स्टॉल
- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल के जिला चंबा प्रशासन का एक और कारनामा सामने आया है। पिछले साल मिंजर मेले के दौरान बाहरी राज्यों से आए कारोबारी मुफ्त में स्टॉल लगा गोल गप्पे और चाट पापड़ी बेच लाखों कमा कर चले गए। ऐसे में 10 स्टॉल बेचकर होने वाली कमाई से न तो जिला प्रशासन के हाथ फूटी कौड़ी आई और न स्थानीय कारोबारियों को इसका लाभ मिला। सूचना के अधिकार के तहत ली गई जानकारी में चंबा जिला प्रशासन की इस कारगुजारी का खुलासा हुआ है।
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हर वर्ष बाहरी राज्यों से मेला लगाने के लिए पहुंचने वाले हलवाई हजारों के स्टॉल खरीदकर भी मोटी कमाई करते हैं, लेकिन उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र और जिला प्रशासन ने तिकड़म लगाते हुए हलवाइयों को फ्री में ही स्टॉल दे दिए। निशुल्क आवंटित स्टॉलों के बारे में चंबा के चित्रकार व आरटीआई कार्यकर्ता पद्मश्री विजय शर्मा ने जिला प्रशासन से जानकारी मांगी कि बाहरी राज्यों से आए हलवाइयों को आवंटित स्टॉलों से मेला कमेटी को कितनी आमदनी हुई।
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जिलाधीश चंबा ने आवेदन एसडीएम के पास भेजा। एसडीएम ने बताया कि चौगान नंबर एक में स्टॉल बनाने वाले ठेकेदार को ही स्टॉल दे दिए। इसके बाद ठेकेदार ने आगे किसे स्टाल आवंटित किए, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। आरटीआई कार्यकर्ता ने उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला से जानकारी मांगी कि उन्होंने मुख्य चौगान में कितने रुपयों में स्टाल खरीदे? लिखित में इसके नियम व शर्तों की जानकारी प्रदान की जाए। इस पर उन्हें जवाब मिला कि उन्हें ये दस स्टाल जिला प्रशासन ने निशुल्क दिए थे और केंद्र ने ये स्टाल आगे हलवाइयों को फ्री में दे दिए।
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आरटीआई के तहत जुटाई जानकारी को कार्यकर्ता ने अपने फेसबुक पर भी मामला उजागर किया था। इससे पता चलता है कि जिला प्रशासन की दरियादिली से जहां दस स्टॉल की एवज में एकत्रित होने वाले राजस्व से उसे वंचित रहना पड़ा, वहीं, स्थानीय हलवाइयों को भी इस विशेष सुविधा से वंचित रखा गया। आखिर उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र पर किस नियम के तहत यह दरियादिली दिखाई गई, जबकि केंद्र के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।