कम खर्चे में अब घर बैठे भी हो सकेगा सर्वाइकल कैंसर टेस्ट, 100 फीसदी तक है सटीक
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अब जानलेवा सर्वाइकल कैंसर का टेस्ट घर बैठे किया जा सकेगा। इसमें जांच का खर्च कम होगा और परिणाम अधिक सटीक होंगे। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए पोर्टेबल डिवाइस विकसित करने में सफलता मिली है। यह उपकरण आसानी से टेस्ट के लिए मरीज के घर यहां तक कि दुर्गम इलाकों में भी पहुंचाया सकेगा। यह उपकरण एक्युरेसी के साथ माइक्रोस्कोप की तस्वीरों का विश्लेषण करेगा।
हालांकि सर्वाइकल कैंसर की जांच का गोल्ड स्टैंडर्ड यानी पैप स्मियर टेस्ट है।
इससे रोग का जल्द पता लगाया जा सकता है पर गलती का खतरा रहता है। विभिन्न शोधों में सामने आया है कि पैप स्मियर टेस्ट की एक्यूरेसी 60 से 85 प्रतिशत के बीच है, लेकिन इस पोर्टेबल डिवाइस से कैंसर का पता लगाने की एक्यूरेसी 88 से 100 फीसदी है। इसमें एआई-आधारित एल्गोरिद्म का विकास किया, जो डिवाइस को अपनेआप सर्वाइकल कैंसर की जांच करने की क्षमता देता है। बता दें कि बंगलूरू के एंद्रा सिस्टम्स के सहयोग से यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण
आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कम्प्यूटिंग एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल साव ने बताया कि अर्नव भावसर व छात्राओं में सृष्टि गौतम और क्रांति गुप्ता की मदद से यह शोध किया गया है। डिवाइस और एल्गोरिद्म के इंटरनेशनल पेटेंट के लिए आवेदन किए गए हैं। यह कई अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हुए हैं।
साल 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल 74 हजार महिलाओं की मौत सर्वाइकल कैंसर से हो जाती है। वुमंज हेल्थ के जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ट की उपलब्धता अधिक न होने के कारण देश में मात्र 3.1 प्रतिशत महिलाओं की इस हालत के लिए जांच हो पाती है। कमर, पैर में दर्द महसूस होना, थकान, वजन में कमी, भूख न लगना इसके अन्य लक्षण हैं।
बचाव के तरीके
महिलाओं को नियमित रूप से अपनी जांच करवानी चाहिए। हर तीन साल पर पैप स्मीयर टेस्ट करवाना चाहिए। इसके अलावा एचपीवी वायरस से बचाव के टीके भी लगवाने चाहिए। व्यायाम और पौष्टिक भोजन करना चाहिए।