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मुख्य सचिव नियुक्ति मामले में कैट ने सुनाया बड़ा फैसला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 21 Jan 2017 12:09 PM IST
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हिमाचल में चीफ सेक्रेटरी पद पर दो सीनियर आईएएस की अनदेखी कर जूनियर को प्रमोट करने के मामले में शुक्रवार को चंडीगढ़ केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने याचिकाकर्ता दोनों आईएएस विनीत चौधरी और दीपक सानन को कंपीटेंट अथॉरिटी को ज्वाइनिंग के लिए रिक्वेस्ट भेजने को कहा है।
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वहीं, ट्रिब्यूनल ने प्रतिवादी पक्ष को दोनों आईएएस की रिक्वेस्ट पर विचार करते हुए उन्हें समकक्ष पद पर ज्वाइनिंग देने के लिए विचार करने को कहा है। हालांकि शुक्रवार को प्रतिवादी पक्ष की ओर से मामले में जवाब दाखिल नहीं किया जा सका। ट्रिब्यूनल ने उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए 27 जनवरी तक का समय दिया है।
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पांच जनवरी को हिमाचल कैडर के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी दीपक सानन और विनीत चौधरी ने ट्रिब्यूनल में दायर केस में चीफ सेक्रेटरी पद पर प्रमोट हुए वीसी फारका की प्रमोशन को चैलेंज किया था। याचिकाकर्ताओं ने यूनियन ऑफ इंडिया को सेक्रेटरी के जरिए, चीफ सेक्रेटरी हिमाचल सरकार और आईएएस वीसी फारका को प्रतिवादी पार्टी बनाया था। याचिका पर ट्रिब्यूनल ने 20 जनवरी को जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस किया था।
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1982 बैच के आईएएस विनीत चौधरी की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि वह वर्तमान में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के तौर पर हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर विभाग देख रहे हैं। उन्होंने पिछले साल 31 मई को चीफ सेक्रेटरी के उस आदेश को खारिज करने की अपील की थी, जिसमें वीसी फारका को पदोन्नत कर चीफ सेक्रेटरी बनाया गया है।
उनके अनुसार फारका उनसे जूनियर हैं और बिना सिविल सर्विसेज बोर्ड व सीनियर अधिकारियों की अनुमति के उन्हें पदोन्नति दी गई है। यह आईएएस कैडर रूल्स, 1954 का उल्लंघन भी हैं। वहीं आईएएस दीपक सानन ने भी उनकी सीनियारिटी की अनदेखी कर फारका की नियुक्ति को चैलेंज किया था। उन्होंने खुद से जूनियर आईएएस की प्रमोशन को चैलेंज करते हुए इसे खारिज करने की मांग की थी।
फारका के सीएस बनने से बढ़ा विवाद
पी. मित्रा की सेवानिवृत्ति के बाद प्रदेश सरकार ने जून 2016 में वीसी फारका को मुख्य सचिव बनाया है। इसका सीनियर आईएएस अफसर दीपक सानन, विनीत चौधरी और उपमा चौधरी ने विरोध किया। तीनों अफसरों ने जूनियर अफसर के नीचे काम करने से मना कर दिया और लंबी छुट्टी पर चले गए।
इस बीच उपमा चौधरी की आईएएस प्रशिक्षण संस्थान मसूरी में निदेशक पद पर तैनाती हो गई। लेकिन सानन और विनीत चौधरी ने अपनी मेडिकल लीव को बढ़ाने के लिए फिर सरकार से आवेदन कर दिया। तब से अब तक वह मेडिकल लीव पर हैं।
सरकार के फैसले को दी थी चुनौती
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीपक सानन और विनीत चौधरी ने प्रदेश सरकार के इस फैसले को कैट में चुनौती दी थी। इसमें कहा गया था कि दोनों अफसर चीफ सेक्रेटरी से सीनियर हैं। ऐसे में वे जूनियर अधिकारी के नीचे काम नहीं कर सकते।
इन पदों पर हो सकती है तैनाती
सूत्र बताते हैं कि वरिष्ठ आईएएस अफसरों ने बिजली बोर्ड के चेयरमैन, एचपीएसआईडीसी चेयरमैन या प्रदेश सरकार में प्रिंसिपल एडवाइजर के पद पर तैनाती की इच्छा जताई है। गौरतलब है कि दीपक सानन इस महीने सेवानिवृत्त भी हो रहे हैं।
कार्मिक विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण श्रीधर ने कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को रखी है। ट्रिब्यूनल ने विनीत चौधरी और दीपक सानन को नियुक्ति देने के मामले में सहानुभूति पूर्वक विचार करने को कहा है।