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अवैध डंपिंग की रिपोर्ट में देरी पर पर्यावरण मंत्रालय ने मांगा जवाब, अफसरों में हड़कंप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिलासपुर
Updated Fri, 12 Oct 2018 11:55 AM IST
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फोरलेन निर्माण में वन भूमि पर की गई अवैध डंपिंग को लेकर वन विभाग के देहरादून स्थित पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तकनीकी अधिकारी ने हिमाचल सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) से रिपोर्ट मांगी है। तकनीकि अधिकारी ने यहां तक लिखा है कि इससे पहले भी राज्य सरकार से इस मामले में रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन आजतक कोई रिपोर्ट नहीं दी गई।
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इसी का जिक्र करते हुए अब अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) से पूरी शिकायत की बिंदूवार रिपोर्ट मांगी है। वहीं, हिमाचल सरकार के मुख्य वन संरक्षक एवं नोडल अधिकारी (एफसीए) को भी प्रतिलिपि भेजकर जानकारी मुहैया करवाने को कहा गया है। इस मामले में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने 16-7-2018 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय देहरादून को ज्ञापन भेजा था।
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इसमें सड़क निर्माण कर रही कंपनी पर मलबे को गोबिंद सागर झील में डंप करने का आरोप लगाया गया था। बताया गया था कि अवैध डंपिंग से मछुआरों की रोजी रोटी खतरे में पड़ गई है। वन भूमि में डंपिग होने से पर्यावरण भी प्रभावित हो रहा है। ज्ञापन में कहा गया कि फोरलेन के भूमि अधिग्रहण प्लान को एनएचएआई ने अपने स्तर पर बदल कर वन भूमि से हाईवे निकाल दिया है। उधर, मंत्रालय से जवाब तलब किए जाने के तुरंत बाद अतिरिक्त मुख्य अरण्यपाल (वन) अर्चना शर्मा ने बिलासपुर के अरण्यपाल को बिना देरी किए रिपोर्ट भेजने के आदेश जारी किए हैं।
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इसमें यह भी पूछा गया है कि रिपोर्ट देने में देरी क्यों की गई। बिलासपुर के अरण्यपाल ने भी एनएचएआई के परियोजना निदेशक को सात दिनों के भीतर संबंधित रिकॉर्ड देने को कहा है। अरण्यपाल वन आरएस पटियाल का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद एनएचआई से गोबिंदसागर झील में मिट्टी को डंप करने और फोरलेन रोड अलाइनमेंट बदलाव को लेकर रिपोर्ट मांगी गई है। एनएचआई को कहा गया है कि वह जल्द इस संदर्भ में रिपोर्ट कार्यालय में प्रस्तुत करे।