Himachal: छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई जांच पूरी, 20 संस्थानों और 105 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर
शुक्रवार को सीबीआई ने 20 संस्थानों और उनके मालिकों, प्रदेश शिक्षा विभाग, बैंक के अधिकारियों सहित 105 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किए हैं।
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हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 181 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में सीबीआई ने जांच पूरी कर ली है। शुक्रवार को सीबीआई ने 20 संस्थानों और उनके मालिकों, प्रदेश शिक्षा विभाग, बैंक के अधिकारियों सहित 105 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किए हैं। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई ने अब तक 19 व्यक्तियों और उच्च शिक्षा निदेशालय शिमला के तत्कालीन कर्मचारियों, शैक्षणिक संस्थानों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, निदेशकों व कर्मचारियों, बैंक कर्मियों प्रदेश सहित बाहरी राज्यों से कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
सीबीआई ने वर्ष 2013 से 2017 के बीच प्रदेश में सामने आए घोटाले को लेकर प्रदेश सरकार के आग्रह पर वर्ष 2019 में मामला दर्ज किया था। इसके बाद प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी तत्काल मामले की जांच की निगरानी की एवं समय-समय पर स्थिति संबंधी रिपोर्ट दायर की गई। मामले के अनुसार भारत सरकार की ओर से अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की मदद के लिए छात्रवृत्ति योजना शुरू की गई, लेकिन इसमें अधिकारियों ने घोटाला किया।
हजारों विद्यार्थियों के नाम पर फर्जी तरीके से करोड़ों का किया घोटाला
छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले पोर्टल में कई खामियां मिलीं। इन खामियों का लाभ उठाते हुए ही निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी तरीके से विद्यार्थियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले और सरकारी धनराशि हड़प ली। वर्ष 2013-14 से 2016-17 तक शिक्षा विभाग ने भी छात्रवृत्ति योजनाओं की मॉनीटरिंग नहीं की।
प्रवर्तन निदेशालय ने 10.67 करोड़ की संपत्ति की अटैच
प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस मामले में शिकंजा कसा है। कई आरोपियों की संपत्तियां अटैच की गईं। अब तक 10.67 करोड़ की संपत्ति अटैच की जा चुकी है। इनमें 14 बैंक खातों में जमा राशि भी शामिल है। ईडी इस मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज एक एफआईआर के आधार धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई अमल में ला रही है।
80 फीसदी बजट निजी, 20 फीसदी सरकारी संस्थानों को किया जारी
छात्रवृत्ति का 80 फीसदी बजट निजी और 20 फीसदी सरकारी संस्थानों को जारी किया गया। इस मामले में हर स्तर पर अनियमितताएं बरती गईं। आपसी मिलीभगत से निजी संस्थानों को पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर छात्रवृत्ति के लिए बजट जारी हुआ।
ऐसे हुआ खुलासा
सरकार को शिकायत मिली कि जनजातीय क्षेत्र लाहौल-स्पीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिली। ऐसे में शिक्षा विभाग ने पहले अपने स्तर पर जांच की तो बड़े स्तर पर अनियमितताएं पाई गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सीबीआई से जांच की सिफारिश की। इसके बाद सीबीआई ने मई 2019 को आपराधिक, विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी के लिए आईपीसी की धारा 409, 419, 465, 466 और 471 के तहत मामला दर्ज किया था।