{"_id":"60fc514c8ebc3e585b5864c9","slug":"captain-deepak-guleria-martyr-in-kargil-land-was-not-found-for-the-road-to-the-grave-site","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैप्टन दीपक गुलेरिया ने कारगिल में पाई शहादत, समाधि स्थल तक सड़क के लिए नहीं मिली भूमि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैप्टन दीपक गुलेरिया ने कारगिल में पाई शहादत, समाधि स्थल तक सड़क के लिए नहीं मिली भूमि
Sun, 25 Jul 2021 01:05 PM IST
Krishan Singh
एचसी पठानिया, अमर उजाला, टिहरा (मंडी)
एचसी पठानिया, अमर उजाला, टिहरा (मंडी)
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 25 Jul 2021 01:05 PM IST
सार
समाधि स्थल पर बने इस रणबांकुरे का पार्क आज भी सरकार से अपने सही गौरव के स्वरूप के लिए तरस रहा है। इसका उनके पिता पूर्व डीआईजी स्व. मोहन लाल गुलेरिया को भी मलाल था। वह अपने पैसे से समाधि स्थल का रखरखाव करते थे। मोहन लाल सीआरपीएफ से बतौर डीआईजी रिटायर हुए थे। करीब दो साल पहले उनका देहावसान हुआ है।
विज्ञापन
शहीद कैप्टन दीपक गुलेरिया(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकाघाट उपमंडल के चौलथरा गांव में वर्ष 1999 में शहीद कैप्टन दीपक गुलेरिया की याद में बना शहीदी पार्क आज भी सड़क से नहीं जुड़ा है। सरकार ने लोगों से सड़क बनाने का वायदा किया था, लेकिन इसमें कुछ लोगों की मलकीयत भूमि आने से आज तक संपर्क सड़क नहीं बन पाई। समाधि स्थल पर बने इस रणबांकुरे का पार्क आज भी सरकार से अपने सही गौरव के स्वरूप के लिए तरस रहा है। इसका उनके पिता पूर्व डीआईजी स्व. मोहन लाल गुलेरिया को भी मलाल था।
विज्ञापन
वह अपने पैसे से समाधि स्थल का रखरखाव करते थे। मोहन लाल सीआरपीएफ से बतौर डीआईजी रिटायर हुए थे। करीब दो साल पहले उनका देहावसान हुआ है। उनके देहांत के बाद पार्क की देखरेख करने वाला कोई नहीं है। शहीद की पत्नी पूनम गुलेरिया पंचकूला में रह रही हैं। वह आर्मी स्कूल में नौकरी करती थीं, लेकिन बाद में जॉब छोड़ दी है। शहीद का एक बेटा है, जिसने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की है। अब एमबीए कर रहा है। एसडीएम सरकाघाट राहुल जैन ने बताया कि उन्होंने हाल में ज्वाइन किया है। इस संदर्भ में जानकारी जुटाई जाएगी और संभव मदद की जाएगी।
विज्ञापन
31 साल की उम्र में देश पर कुर्बान हो गए थे कैप्टन दीपक गुलेरिया
कैप्टन दीपक गुलेरिया ने 31 साल की उम्र में देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्हें सेना मेडल गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया गया था। उनकी शहादत के समय बेटा ध्रुव एक साल का था। फौजी परिवार से संबंध रखने वाले कैप्टन दीपक गुलेरिया 1992 में सीडीएस के जरिये बतौर लेफ्टिनेंट भर्ती हुए। उन्होंने इंग्लिश ऑनर्स और लॉ करने के बाद सेना को चुना। कैप्टन दीपक गुलेरिया लॉन टेनिस और बास्केटबाल के बेहतरीन खिलाड़ी थे। सीनियर सेकेंडरी स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखा गया है। गत वर्ष कैप्टन दीपक की कांस्य प्रतिमा स्कूल में स्थापित की गई थी।
विज्ञापन