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छह माह टले छावनी बोर्ड चुनाव, बढ़ा प्रतिनिधियों का कार्यकाल

Fri, 07 Feb 2020 11:00 AM IST
Krishan Singh राकेश शर्मा, अमर उजाला, सोलन
राकेश शर्मा, अमर उजाला, सोलन Published by: Krishan Singh Updated Fri, 07 Feb 2020 11:00 AM IST
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Cantonment board elections postponed for six months, increased tenure of delegates
सांकेतिक तस्वीर

 देश भर के 55 छावनी बोर्डों में चुनाव की तारीख टल गई है। रक्षा मंत्रालय ने पार्षदों का कार्यकाल छह माह के लिए बढ़ा दिया है। अब छावनी बोर्ड में दस फरवरी को चुनाव नहीं होंगे। रक्षा मंत्रालय ने  इस संबंध में अधिसूचना जारी की है। चुनाव न होने के लिए प्रशासनिक कारण को जिम्मेदार बताया गया है। यह फेरबदल छावनी बोर्ड एक्ट 2006 के प्रावधानों के अनुसार किया गया है। 

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छावनी बोर्ड के पास दो बार चुनाव को छह-छह माह तक टालने का अधिकार है। हिमाचल में आधा दर्जन छावनी बोर्ड हैं, जिनमें सबसे ज्यादा शिमला संसदीय क्षेत्र में हैं। इनमें से योल को छावनी बोर्ड से बाहर करने का निर्णय हो चुका है जबकि सुबाथू, कसौली, डगशाई, जतोग, डलहौजी व बकलोह में 10 फरवरी को बोर्ड के चुनाव होने थे। चुनाव टलने का फायदा छावनी बोर्ड में विरोध कर रहे लोगों को भी होगा। छावनी में रहने वाले लंबे समय से उन्हें पंचायती राज में शामिल करने की मांग पर अड़े हैं।
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केंद्र को देश भर की छावनी बोर्ड के माध्यम से कई प्रस्ताव भेजे गए हैं। इसके अलावा छावनी वासी सांसदों व राज्य सरकार के मंत्रियों के माध्यम से भी अपनी आवाज दिल्ली तक पहुंचा चुके हैं। अब चुनाव टलने को छावनी बोर्ड को पंचायती राज के दायरे में लाने की तैयारियों के रूप में भी देखा जा रहा है। फिलहाल, छावनी बोर्ड के चुनाव को छह माह तक टालने बारे अधिसूचना रक्षा मंत्रालय के उपनिदेशक राजेश कुमार शाह की तरफ से कमांड कार्यालय को जारी हुई है। 
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चुनाव टालना स्वगत योग्य कदम : दिनेश
छावनी बोर्ड सुबाथू के उपाध्यक्ष दिनेश गुप्ता का कहना है कि चुनाव छह माह तक टालना स्वागत योग्य कदम है। इससे छावनी बोर्ड को पंचायती राज में ढालने के प्रयासों को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि छावनी बोर्ड में पंचायती राज व्यवस्था लागू करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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