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कैग रिपोर्ट में खुलासा, HPTDC को इसलिए हुआ एक करोड़ का नुकसान

Sat, 07 Apr 2018 02:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Sat, 07 Apr 2018 02:31 PM IST
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CAG Report  crore rupee loss to Himachal Pradesh Tourism Development Corporation

दिल्ली-शिमला और दिल्ली-मनाली मार्ग पर चलने वाली लक्जरी वातानुकूलित बसों के किराया संशोधन में देरी से पर्यटन विकास निगम को करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। वीरवार को विधानसभा में पेश की गई कैग रिपोर्ट में बताया गया कि पर्यटन विकास निगम समिति इन दोनों मार्गों पर कांट्रैक्ट कैरियर के रूप में अपनी बसों का परिचालन कर रही है।

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ये दो बस मार्ग हरियाणा क्षेत्र में 211 और 189 किलोमीटर दूरी तय करते हैं। लेखा परीक्षा में पाया गया कि हरियाणा सरकार ने 23 अगस्त 2013 से लक्जरी वातानुकूलित बसों का प्रति किलोमीटर बस किराया बढ़ाकर 1.08 रुपये से 1.88 रुपये कर दिया। इसके चलते पर्यटन विकास निगम की बसों के किराए में संशोधन अपेक्षित था।
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हरियाणा सरकार द्वारा किराए में इस वृद्धि के मद्देनजर दिल्ली-शिमला और दिल्ली-मनाली मार्ग पर हरियाणा क्षेत्र के लिए प्रति टिकट का खर्च 168.50 रुपये और 151.20 रुपये है लेकिन पर्यटन निगम ने 30 सितंबर 2014 तक इन दो मार्गों पर वृद्धि दर लागू नहीं की।
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निगम ने पहली अक्तूबर 2014 से लग्जरी वातानुकूलित बसों के लिए किराए में संशोधन किया। सितंबर 2013 से सितंबर 2014 तक निगम ने 61,730 पर्यटकों से कम किराया लिया। इस कारण निगम को करीब एक करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।

सफेद हाथी साबित हो गई एक करोड़ की चार क्रेनें

CAG Report  crore rupee loss to Himachal Pradesh Tourism Development Corporation

राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को उठाने के लिए खरीदी गई एक करोड़ कीमत की चार क्रेन सफेद हाथी साबित हो रही हैं। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस विभाग ने नियमों और भारत सरकार के आदेशों को दरकिनार कर एक करोड़ की ऐसी क्रेन खरीद ली, जो पहाड़ी क्षेत्र में काम करने लायक ही नहीं थी।

यही नहीं, इन क्रेनों को चलाने के लिए जरूरी स्टाफ को ट्रेनिंग तक नहीं दी गई। नतीजतन, सरकार का करीब एक करोड़ रुपये बर्बाद हो गया। राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना राहत सेवा स्कीम के तहत साल 2010 में चार भारी क्रेनों की खरीद की गईं। सीएजी रिपोर्ट के अनुसार इन क्रेनों को चार जिलों में आवंटित किया गया, लेकिन मंडी को छोड़कर किसी भी अन्य जगह इनका संचालन नहीं हो सका।

ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि विभाग ने क्रेन खरीद के समय आपूर्तिकर्ता द्वारा इसके कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का प्रावधान ही नहीं किया। यह क्रेनें सिर्फ शोपीस बनकर रह गईं। रिपोर्ट के अनुसार खरीद के दौरान केंद्र सरकार के मानकों को दरकिनार किया गया। ऐसी क्रेन खरीदी गईं, जो सिर्फ 500 किलोग्राम वजह ही उठा सकती थीं।

इसके चलते दुर्घटना के समय इन क्रेनों की मदद से वाहन को हटाया ही नहीं जा सका। ऐसे में तकनीकी व प्रशिक्षण की कमी के चलते इनकी खरीद पर खर्च हुए करीब एक करोड़ रुपये बर्बाद हो गए। खास बात यह है कि सीएजी ने इस संबंध में सरकार को रिपोर्ट भेजी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उस रिपोर्ट पर कोई संज्ञान ही नहीं लिया।

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