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पांच से सात रुपये किलो बिक रही गोभी, किसानों को 35 में मिल रहा कॉर्टन

Tue, 19 May 2020 09:30 AM IST
Krishan Singh सतीश ठाकुर, अमर उजाला, गोहर (मंडी)
सतीश ठाकुर, अमर उजाला, गोहर (मंडी) Published by: Krishan Singh Updated Tue, 19 May 2020 09:30 AM IST
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Cabbage is being sold for five to seven rupees per kg, farmers getting Corten for 35
प्रतीकात्मक तस्वीर

लॉकडाउन में खरीदारों की कमी होने से किसानों को गोभी के दाम न मिलने से भारी झटका लगा है। आलम यह है कि पांच से सात रुपये प्रति किलो गोभी को पैक करने वाला कॉर्टन किसानों को बाजार में 35 रुपये मिल रहा है। किसानों की गोभी खेतों में खराब हो गई है। अनेक किसानों ने गोभी पशुओं को खिलानी शुरू कर दी है। मंडी में नाचन, सराज, बल्ह, करसोग, सदर, सुंदरनगर, द्रंग, सरकाघाट समेत अनेक ब्लॉकों में गोभी पककर तैयार हो गई है। दाम न मिलने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। जिले के 10 ब्लॉकों में किसानों को गोभी के दाम न मिलने से करीब 2 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है।

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किसानों खीमा राम, मुरारी, धर्मेंद्र, हेम सिंह, टेक सिंह, मतिधर, हिमाचली, मीरा, कृष्ण, लाभ सिंह और विकास ने बताया कि गोभी की नो डिमांड से उनको लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है। पिछले साल किसानों को गोभी के दाम 20 रुपये तक प्रति किलो मिले थे। जो इस साल के रेट से 35 फीसदी अधिक रहा था। मगर इस साल लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के वापस घर जाने और लोगों के बाजार न आने के कारण किसानों को गोभी के  दाम नही मिल पाए हैं। मार्केट कमेटी के सचिव भूपेंद्र कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि गत वर्ष की अपेक्षा किसानों को इस बार फूलगोभी के कम दाम मिलने लाखों का नुकसान हुआ है।

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सेब बगीचों पर एफिड कीट का हमला, बागवान चिंतित

लॉकडाउन में बागवानों के सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। घाटी में सीजन को कुछ ही समय बचा है। इससे पहले सेब के पेड़ों की नई पत्तियों मेें एफिड कीट ने हमला बोल दिया है। ये कीट नई पत्तियों को प्रभावित करने के बाद फलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। बागवानों के लिए ये कीट दुविधा पैदा कर रहे हैं। यदि कीट पर कीटनाशक दवा के छिड़काव करें तो उसका भी सेब के पेड़ों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। जिससे पेड़ों में माइट कीट पनपने लगता है। ऐसे में बागवान परेशानी में है कि वे इस विकट परिस्थिति से अपनी फसल को कैसे बचाएं। बागवान रंजीत, उमेश, महेंद्र, जय कुमार, रोहित, राघव, चुन्नी लाल ने कहा कि एफिड कीट ने सेब के बगीचों में हमला कर दिया है।

उन्होंने कहा कि इस कीट के कारण पेड़ों की पत्तियां सूख कर समय से पूर्व ही गिरने लगती है। इसका सीधा प्रभाव फसल की पैदावार पड़ता है। उधर, उद्यान विभाग के उप निदेशक का कार्यभार देख रहे प्रेम कुमार ने कहा कि अगर बागवानों के सेब के बगीचों में एफिड कीट पत्तियों पर प्रभाव डाल रहे हैं। तो वे एलांटों या मैलाथियोन दवा का छिड़काव करें। उन्होंने कहा कि माइट की चपेट में सेब के पेड़ न आए उसके लिए भी बागवान मैड्रिन तथा मैजिस्ट्रिक दवा का प्रयोग करें। बागवान इन सभी दवाओं को एक से दो एमएल प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव कर सकते हैं। 

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