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उपचुनाव: वीरभद्र फैक्टर भुनाने की कोशिश में चेतन पर बरसे उनके खेमे के कांग्रेस नेता
Sun, 17 Oct 2021 09:26 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 17 Oct 2021 09:26 PM IST
सार
एक दिन पहले ही चेतन बरागटा के समर्थकों ने वीरभद्र सिंह जिंदाबाद के नारे लगाए थे। रविवार को प्रदेश कांग्रेस सचिव और वीरभद्र परिवार के नजदीकी नेता महेंद्र स्तान ने कहा कि लोग इन सब बातों को समझते हैं।
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यशवंत छाजटा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वीरभद्र फैक्टर को भुनाने की कोशिश में जुटे निर्दलीय प्रत्याशी चेतन बरागटा और उनके समर्थकों पर बरसते हुए वीरभद्र परिवार के खेमे में रहे उनके करीबी नेताओं महेंद्र स्तान और यशवंत छाजटा ने कहा कि कांग्रेस एकजुट है। जब वीरभद्र सिंह थे, तब ये लोग उन्हें गालियां देते थे। आज व्यक्तिगत हितों को साधने के लिए नारेबाजी कर रहे हैं। जुब्बल-नावर-कोटखाई में कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है।
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एक दिन पहले ही चेतन बरागटा के समर्थकों ने वीरभद्र सिंह जिंदाबाद के नारे लगाए थे। रविवार को प्रदेश कांग्रेस सचिव और वीरभद्र परिवार के नजदीकी नेता महेंद्र स्तान ने कहा कि लोग इन सब बातों को समझते हैं। जुब्बल-नावर-कोटखाई में कांग्रेस मजबूत है। जिला कांग्रेस कमेटी शिमला (ग्रामीण) के अध्यक्ष यशवंत छाजटा ने कहा कि जुब्बल-नावर-कोटखाई में कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है।
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1990 में रोहित के दादा रामलाल ठाकुर से चुनाव हारे थे वीरभद्र
जुब्बल-नावर-कोटखाई से दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह दो बार विधायक रहे थे। जुब्बल-नावर-कोटखाई से कांग्रेस नेता रामलाल ठाकुर 1983 में उस समय मुख्यमंत्री पद से हटाए गए थे, जब वीरभद्र सिंह को पहली बार हिमाचल प्रदेश का सीएम बनाया गया था। वीरभद्र सिंह ने 1983 में सीएम बनने के बाद यहां से उपचुनाव जीता था। इसके बाद 1985 में भी वीरभद्र सिंह चुनाव जीते थे।
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1990 में उनके खिलाफ जुब्बल-कोटखाई से जनता दल से पूर्व मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर भी चुनाव में खडे़ हुए, मगर वीरभद्र सिंह चुनाव हार गए थे। हालांकि, वीरभद्र सिंह ने एक साथ दो सीटों से चुनाव लडे़ थे। वह रोहडू़ से जीत गए थे। रोहित ठाकुर पूर्व सीएम रामलाल ठाकुर के पोते हैं। इसी वजह से उनके वीरभद्र सिंह के साथ अच्छे संबंध नहीं माने जाते थे। इसी को पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा भी भुनाते रहते थे। वीरभद्र सिंह भी नरेंद्र बरागटा से नरमी से पेश आते थे।