बजट 2018: किसानों को राहत, सेब बागवानों की फिर टूटी आस
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केंद्रीय बजट में खेतीबाड़ी के प्रोत्साहन को लेकर लिए फैसलों से हिमाचल के 62 प्रतिशत किसानों को भी फायदा मिलेगा, लेकिन सेब बागवानों की एक बार फिर उम्मीद टूटी है। सबसे बड़ा लाभ हिमाचल में टमाटर और आलू के उत्पादकों को होगा, जिनके लिए ऑपरेशन ग्रीन लांच किया जा रहा है।
खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को डेढ़ गुना करने से हिमाचल की मक्का और धान की खेती को प्रोत्साहन मिलेगा। वहीं, सेब बागवानों की विदेशी सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने की मांग एक बार फिर अनसुनी रह गई।
हिमाचल प्रदेश में 88 प्रतिशत किसान मार्जिनल और लघु श्रेणी में आते हैं। 80 प्रतिशत क्षेत्र असिंचित है जबकि 8 प्रतिशत सिंचाई के अधीन आता है। ऐसे में केंद्र सरकार के खरीफ की पैदावार के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य को उत्पादन लागत का डेढ़ गुना करना छोटे किसानों को लाभ देगा। खरीफ की फसलों में मक्का प्रमुख खेती है। जंगली सुअरों, सूखे की स्थिति और बीमारी से खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचता है, जिसके लिए किसान बीमा योजना का लाभ मिलेगा।
पैदावार बंपर होने पर किसानों को औने पौने दाम पर अपनी पैदावार बेचने की जगह इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा। इसके अलावा टमाटर और आलू की प्रदेश में व्यापक खेती होती है। आलू की दो सौ मैट्रिक टन की पैदावार होती है, जबकि टमाटर की खेती भी लगभग इतनी ही है।
ऑपरेशन ग्रीन से सब्जी उत्पादकों को लाभ
सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने वाले ऑपरेशन ग्रीन से हिमाचल के अधिकांश जिलों को फायदा मिलेगा। आलू और टमाटर की खेती से हिमाचल के जिले जुड़े हैं। कांगड़ा, लाहौल, मंडी में आलू पैदावार होती है।
टमाटर की पैदावार में सोलन जिला सबसे आगे है, इसके अलावा सिरमौर और कुल्लू जिले में टमाटर की खेती होती है। इन सभी जिलों को केंद्र के ऑपरेशन ग्रीन के तहत उन्नत बीज, सिंचाई और विपणन का प्रावधान रखा गया है। इससे टमाटर और आलू बेल्ट को खासा लाभ मिलेगा।
हिमाचली में खेती-किसानी
- 62 प्रतिशत आबादी खेतीबाड़ी से है जुड़ी
- राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 9.4 प्रतिशत कृषि
- 9.61 लाख किसानों के पास 9.56 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि
खरीफ की पैदावार
मक्का - 740 मीट्रिक टन
धान - 132 मीट्रिक टन
राजमा - 2.21 मीट्रिक टन
दालें - 10.92 मीट्रिक टन