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धर्मशाला: दलाईलामा बोले- मेरी शिक्षाओं को परीक्षण करने बाद ही करें स्वीकार
Mon, 16 May 2022 09:25 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 16 May 2022 09:25 PM IST
सार
वीडियो संदेश में बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि बुद्ध ने अपने अनुभव से कहा है कि जिस तरह सोने की परख रगड़कर, काटकर तथा पिघलाकर की जाती है, उसी प्रकार मेरी शिक्षाओं का परीक्षण करने के बाद ही उन्हें स्वीकार करें।
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मुख्य बौद्ध मंदिर में दलाईलामा।
- फोटो : संवाद
विस्तार
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने जनकल्याण को संदेश देते हुए कहा कि बैसाख पूर्णिमा के दिन बुद्ध ने कठिन तपस्या कर बुद्धत्व की प्राप्ति की थी। इसलिए यह पवित्र दिन है। वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि बुद्ध ने अपने अनुभव से कहा है कि जिस तरह सोने की परख रगड़कर, काटकर तथा पिघलाकर की जाती है, उसी प्रकार मेरी शिक्षाओं का परीक्षण करने के बाद ही उन्हें स्वीकार करें। इसलिए नहीं कि तुम मेरा सम्मान करते हो। उन्होंने कहा कि मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं, सभी धर्म अच्छे हैं। सभी करुणा की बात करते हैं और अति उत्तम हैं। सोने की तरह रगड़कर काटकर तथा पिघलाकर परीक्षण करना ऐसा किसी अन्य धर्म में नहीं कहा गया है।
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यह बुद्ध के वचन हैं। बुद्ध का उपदेश है कि बुद्ध सत्वों के पापों का जल से प्रक्षालन नहीं करते हैं। न ही सत्वों के दुखों को अपने हाथों से हटाते हैं। बुद्ध अपने ज्ञान को दूसरों से प्रेषित भी नहीं करते हैं। महाकरुणा के सागर तथा तथागत बु्द्ध सत्यों के प्रति प्रेम के कारण अपने ज्ञान को सत्वों में प्रेषित नहीं करते हैं, बल्कि शून्यता की व्याख्या कर सत्वों को वास्तविकता (शून्यता) पर विचार करने के लिए प्रेरित करते हैं। दलाईलामा ने मैक्लोडगंज के मुख्य बौद्ध मंदिर में कालचक्र पूजा में भाग लिया। इसमें उन्होंने बौद्ध लामाओं के साथ मंत्रोच्चारण कर विश्व कल्याण की प्रार्थना की। दलाईलामा ने तिब्बती समुदाय के लोगों को मंदिर परिसर में आशीर्वाद भी किया।
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