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माइनस 25 डिग्री तापमान और बर्फीले तूफान के बीच बीआरओ ने बचाईं आठ जिंदगियां
Tue, 10 Dec 2019 06:35 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केलांग (लाहौल स्पीति)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केलांग (लाहौल स्पीति)
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 10 Dec 2019 06:35 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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13050 फीट ऊंचे रोहतांग दर्रे में माइनस 25 डिग्री तापमान और बर्फीले तूफान के बीच फंसे लाहौल के आठ यात्रियों के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के जवान देवदूत बनकर पहुंचे। 150 किलोमीटर रफ्तार के बर्फीले तूफान के बीच भी बीआरओ के जवानों ने सोमवार देर रात तक बर्फ हटाने का अभियान जारी रखा। बीआरओ ने टैक्सी से सफर कर रहे इन यात्रियों को सुरक्षित मनाली पहुंचाया। इनमें दो महिलाएं भी शामिल थीं।
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दरअसल, बीते सोमवार सुबह मौसम साफ होने पर आठ लोग एक टैक्सी को लेकर लाहौल से मनाली की तरफ रवाना हुए। लेकिन रोहतांग दर्रा पहुंचते ही अचानक बर्फीला तूफान चलने से सड़क अवरुद्ध हो गई। ये लोग रोहतांग दर्रे में करीब दस घंटे तक फंसे रहे। गनीमत यह रही कि उस दौरान रोहतांग में बीआरओ के जवान बर्फ हटाने में जुटे थे।
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फंसे यात्रियों के परिजन लगातार फोन के जरिए उनका हाल जान रहे थे। वाहन मालिक किशन, यात्री राहुल और अनिल ने बताया कि जैसे ही वे लोग रोहतांग दर्रा पहुंचे, वहां पर बर्फीला तूफान चलने लगा। इससे सड़क किनारे पड़ी बर्फ का ढेर सड़क पर बिछ गया। वाहन का आगे खिसकना तक मुश्किल हो गया। बीआरओ के 70 और 94 आरसीसी के जवानों ने बर्फीले तूफान की परवाह किए बगैर देर रात तक बर्फ हटाने का अभियान जारी रखा।
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हालात इस कदर बदतर हो गए कि सड़क से बर्फ हटाने के कुछ ही मिनटों बाद फिर से सड़क पर बर्फ जमने लगी। रात के अंधेरे में जान की परवाह किए बगैर जवानों ने आखिरकार रात करीब दस बजे सड़क को बहाल कर आठ लोगों को सुरक्षित निकालकर मनाली पहुंचाया। देर रात तक रोहतांग दर्रा में मोर्चा संभाले रहे बीआरओ 94 सुपरवाइजर सुभाष हंस, बीआरओ 70 आरसीसी के कैप्टन आशीष, 94 आरसीसी के कार्यकारी ओसी के पॉल राज समेत कई जवान इस ऑपरेशन में डटे रहे।