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चीन के खिलौनों और सजावटी सामान का बहिष्कार, मोबाइल का नहीं विकल्प

Sun, 28 Jun 2020 08:59 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 28 Jun 2020 08:59 AM IST
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Boycott of Chinese toys and decoration items by peoples in Himachal Pradesh
मोबाइल फोन - फोटो : पेक्सेल्स

लद्दाख की गलवां घाटी  में देश के 20 जवानों की शहादत के बाद चीन को सबक सिखाने के लिए सामान के बहिष्कार अभियान के बीच देवभूमि हिमाचल में भी इसका असर देखा जा रहा है। चीन में बने खिलौनों और अन्य सजावटी सामानों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। हालांकि, विकल्प न मिलने की वजह से वीबो, एमआई और रेडमी जैसे मोबाइल फोन की मांग अब भी बरकरार है। वहीं, चीन सीमा से सटे किन्नौर के पूह, नमज्ञा और सांगला में चीनी मोबाइल और सामान का पूरी तरह से बहिष्कार किया गया है। यहां दुकानदार न चीन का सामान मंगवा रहे और न ही लोग मांग कर रहे हैं। 

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राजधानी शिमला में चीनी उत्पादों की खरीदारी में भारी गिरावट आई है लेकिन मोबाइल फोन पहले की तरह बिक रहे हैं। शिमला व्यापार मंडल के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह कहते हैं कि शहर में चीन के मोबाइल फोन की मांग पहले जैसी ही है। विकल्प न होने के कारण ग्राहक इनकी मांग कर रहे हैं। कारोबारी चाहते हैं कि चीन में बने उत्पादों का बहिष्कार हो लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार को देश भर में इस पर रोक लगानी चाहिए। शिमला के कारोबारी भी इसमें साथ देंगे।

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कुल्लू जिले में एक हफ्ते के भीतर चीनी मोबाइल की बिक्री में 70 फीसदी तक गिरावट आई है। जिला मुख्यालय ढालपुर के देव कम्युनिकेशन के संचालक एवं डीलर विकास शर्मा ने कहा कि लोगों ने चीनी मोबाइल से किनारा कर लिया है। गुप्ता कम्युनिकेशन के दीपक ने कहा कि एक सप्ताह पहले उनकी दुकान में दस में से आठ लोग चीनी मोबाइल खरीदते थे, मगर अब यह सब उल्टा हो गया है। अखाड़ा बाजार के मोबाइल डीलर अंकुश ने कहा कि भारत को चीनी मोबाइल का विकल्प ढूंढना होगा। स्वदेशी जागरण मंच के जिला मीडिया प्रभारी राजेंद्र चौधरी ने कहा है कि चीन को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने की जरूरत है। 


विन्नी इलेक्ट्रॉनिक्स बिलासपुर के विनीत गुप्ता कहते हैं कि चीन के मोबाइलों की बिक्री में कोई कमी नहीं आई है। एक-दो ग्राहक मांग करते भी हैं कि उन्हें चीनी मोबाइल नहीं चाहिए। लेकिन जब अन्य मोबाइल फोन दिखाए जाते हैं तो वे भी वीबो, एमआई और रेडमी की मांग करते हैं। मंडी जिला में भी महज 10 फीसदी ग्राहक ही चीनी मोबाइल लेने से इंकार कर रहे हैं। कांगड़ा जिला में भी चीन के मोबाइल फोन की बिक्री बरकरार है। 

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