हंगरी से देश के लिए पदक लाने वाले बॉक्सर को स्कूल ने निकाला, ये है वजह
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हंगरी से देश के लिए सिल्वर पदक लाने वाले जूनियर वर्ग के बॉक्सर को एक सरकारी स्कूल ने निकाल दिया है। इस सत्र में महज 18 दिन ही स्कूल आने और खराब परीक्षा परिणाम का हवाला देकर 11वीं कक्षा के इस खिलाड़ी को लिविंग सर्टिफिकेट थमा दिया गया है।
52 किलोग्राम भार में देश में जूनियर वर्ग में दूसरे रैंक के खिलाड़ी नवराज चौहान 20 दिनों तक स्कूल जाते रहे पर इन्हें गेट के भीतर नहीं जाने दिया गया। नवराज ने बताया कि 27 मई से 27 जून तक वह इंटरनेशनल प्रतियोगिता में भाग लेने में व्यस्त रहे।
इस दौरान 27 मई से 9 जून तक रोहतक कैंप में हिस्सा और उसके बाद प्रतियोगिता में भाग लेने हंगरी चले गए। 25 जून से 3 अगस्त तक वह स्कूल से अवकाश पर रहे। स्कूल लौटे तो बताया गया कि कक्षा से उनका नाम काट दिया गया है।
वह 20 दिनों तक स्कूल जाते रहे, लेकिन गेट के भीतर नहीं जाने दिया। स्कूल प्रबंधन समिति की ओर से उन्हें स्कूल लिविंग प्रमाण पत्र दे दिया गया। पूछने पर स्कूल प्रधानाचार्य ने कहा कि तुम स्कूल के लिए नहीं, बल्कि साई के लिए खेलते हो। नवराज अब एशियन चैंपियनशिप के लिए रोहतक में तैयारी कर रहे हैं।
पदक जीतने पर स्कूल ने नवाजे थे नवराज
75 फीसदी उपस्थिति न होने पर जिस खिलाड़ी को स्कूल प्रबंधन ने बाहर निकाला है, उसे प्रतियोगिता से लौटने के बाद सिल्वर मेडल जीतने के लिए बाकायदा नवाजा गया था। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि परीक्षा परिणाम खराब न हो, इसके लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। स्कूल का परीक्षा परिणाम लगातार गिर रहा है। बताया कि इस सत्र में नवराज केवल 18 दिन ही स्कूल आए थे।
स्कूल का रवैया चिंतनीय : चंदेल
खेलो इंडिया स्टेट लेवल सेंटर (साई) के प्रभारी जयपाल चंदेल ने बताया कि एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी के साथ स्कूल में जो व्यवहार हुआ, वह चिंता का विषय है। नवराज के संबंध में स्कूल प्रबंधन को समय-समय पर सूचना दी गई है। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन का रवैया अन्य खिलाड़ियों को लेकर भी सही नहीं है।