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प्लेन क्रैश होने के 50 साल बाद ग्लेशियर में मिला शव

Sun, 22 Jul 2018 12:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मनाली (कुल्लू)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मनाली (कुल्लू) Updated Sun, 22 Jul 2018 12:28 PM IST
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Body of one victims of 1968 Indian Air Force plane crash found in Dhaka glacier base camp

बर्फीली चोटियों में स्वच्छता अभियान पर निकले इंडियन माउंटेनियरिंग फाउंडेशन के 11 सदस्यीय पर्वतारोहियों के एक दल को लाहौल-स्पीति के ढाका ग्लेशियर में 50 साल पहले क्रैश हुए वायुसेना के विमान का मलबा और एक नर कंकाल मिला है।

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वर्ष 1968 में चंडीगढ़ से 102 सैनिकों को लेकर लेह जा रहा एएन-12 विमान लापता हो गया था। 2003 में पहली बार विमान का मलबा और कुछ कंकाल मिले थे। इससे विमान के क्रैश होने की पुष्टि हुई थी। अब एक और कंकाल मिलने पर सेना ने यहां सर्च ऑपरेशन चलाया। स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां भी हरकत में आ गई हैं।

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डीएनए और फोरेंसिक जांच होगी

Body of one victims of 1968 Indian Air Force plane crash found in Dhaka glacier base camp

डीएनए और फोरेंसिक जांच के लिए कंकाल चंडीगढ़ भेजा गया है। डीएनए जांच से ही पुष्ट होगा कि यह कंकाल लापता सैनिकों में से ही किसी का है या नहीं। इसकी पुष्टि लाहौल-स्पीति के पुलिस अधीक्षक राजेश धर्माणी ने की है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया कि अवशेष जांच के लिए चंडीगढ़ ले जाए गए हैं।

जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। 7 फरवरी, 1968 को भारतीय वायुसेना के एंटोनोव एएन-12 ट्विन इंजन टर्बोप्रॉप ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट चंडीगढ़ से लेह रवाना हुआ। लेह में मौसम खराब होने के चलते विमान लौट आया, लेकिन लाहौल की चंद्रभागा और रोहतांग रेंज के पास अंतिम रेडियो संपर्क के बाद खो गया। इसके बाद से विमान और सभी सैनिक लापता थे। 

बर्फ पिघलने पर बाहर आया मलबा और एक हाथ

Body of one victims of 1968 Indian Air Force plane crash found in Dhaka glacier base camp

मलबे को खोजने में विफलता के बाद सेना ने इन्हें लापता घोषित कर दिया। इस एयरक्रॉफ्ट में 98 यात्रियों के अलावा चार क्रू मेंबर थे। वर्ष 2003 में इस एयरक्रॉफ्ट का मलबा दक्षिणी ढाका ग्लेशियर में मिला था। अगस्त 2007 में फिर भारतीय सेना ने ऑपरेशन पनारुथन-3 अभियान चलाया और फिर तीन शव बरामद किए। अब तक छह कंकाल मिल चुके हैं।

सफाई अभियान पर गए टीम सदस्य खीमी राम ने बताया कि अभियान के दौरान उन्हें बर्फ में दबे हुए एक व्यक्ति का बर्फ पिघलने के कारण एक हाथ बाहर दिखा। उन्होंने बताया कि इस बार सामान्य से कम बर्फबारी होने के चलते मलबा और कंकाल बाहर आया है।

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लापता सैनिकों के परिजन दशकों से कर रहे हैं अपनों का इंतजार

Body of one victims of 1968 Indian Air Force plane crash found in Dhaka glacier base camp

पचास साल पूर्व 98 सैन्य जवानों समेत कुल 102 लोगों को लेकर उड़ान भरने वाले वायु सेना के विमान के अवशेष और नर कंकाल मिलने से लापता जवानों के परिजनों को उम्मीद बंधी है। क्रैश हुए वायु सेना के एएन-12 एयरक्राफ्ट का मलबा और एक नर कंकाल मिलने के बाद अब ढाका ग्लेशियर में और अवशेष भी मिल सकते हैं। खासकर बर्फ पिघलने के बाद ग्लेशियर में दबे विमान हादसे का रहस्य सामने आ सकता है।

दरअसल, सात फरवरी 1968 को रोहतांग के समीप संपर्क टूटने के बाद लापता हुए इस एयरक्राफ्ट व सवार जवानों का दशकों तक कुछ पता नहीं लग पाया था। लाहौल-स्पीति जिले में वर्ष 2003 में पहली बार शवों के अवशेष मिलना शुरू हुए। अब दोबारा यहां एक कंकाल व एयरक्राफ्ट के कुछ भाग मिले हैं। पर्वतारोहियों को जिस स्थिति में मलबा और नर कंकाल मिला है, उसकी वजह ग्लेशियर का पिघलना बताया जा रहा है।

जो नर कंकाल मिला है उसका बाजू वाला हिस्सा ही बर्फ से बाहर पाया गया। ऐसे में बर्फ पिघलने का सिलसिला जारी रहने पर कई और कंकाल मिलने की उम्मीद है। पर्वतीय चोटियों पर सफाई अभियान को निकली भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन टीम के सदस्य खीमी राम ने बताया कि ओएनजीसी और आईएमएफ के माध्यम से यह अभियान चलाया गया था।

उन्होंने अभियान के दौरान पाया है कि ग्लेशियर पिघलते जा रहे हैं। इसी वजह से उन्हें बर्फ में दबा विमान का मलबा और एक नर कंकाल बर्फ की सतह पर दिखाई दिए। यह इलाका बड़े स्तर पर फैला हुआ है। मुमकिन है जल्द ही और भी कंकाल मिल जाएं।

2003 में भी मिले थे सैनिकों के कंकाल, खत और अन्य सामान

Body of one victims of 1968 Indian Air Force plane crash found in Dhaka glacier base camp

सेवानिवृत्त पर्वतारोहण रेस्क्यू प्रशिक्षक इंद्र देव शर्मा ने बताया कि वह 2003 में संस्थान की ओर से कोर्स के लीडर बन कर गए थे। सैनिकों के कंकाल के साथ उनका सामान और एक खत भी मिला था।

यह सामान संस्थान को दिया गया था। जिसमें मात्र 68 ही साफ पढ़ा जा रहा था। उन्होंने बताया कि नर कंकाल पर लिपटी वरंडी की जेब से प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार मृतक सैनिक का नाम बेली राम था।

पूर्व में सेना की पश्चिमी कमान द्वारा एक माह तक सीवी 13 और 14 की चोटियों में डेरा डाला था। इस दौरान जहाज का मलबा और कुछ सैनिकों के कंकालों को एकत्र कर उनके परिजनों को सौंपा गया था। अब एक और कंकाल मिलने से लापता लोगों के परिजनों को उनके अवशेष मिलने की उम्मीद जगी है।

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