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सीटी स्कैन मशीन में धमाका, मची अफरातफरी, जान बचाकर भागे मरीज

Thu, 12 Oct 2017 02:10 PM IST
सुमित ठाकुर/अमर उजाला, शिमला
सुमित ठाकुर/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 12 Oct 2017 02:10 PM IST
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blast in citi scan machine at igmc shimla

आईजीएमसी प्रशासन की लापरवाही के चलते बुधवार सुबह मरीज और डॉक्टरों की जान पर बन आई। अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में स्थापित करोड़ों रुपये की सीटी स्कैन मशीन में अचानक शार्ट सर्किट होने से आग भड़क गई। अभी मरीज को मशीन से बाहर निकाला ही था कि इसमें जोरदार धमाका हो गया। 

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सारे कर्मचारी, डॉक्टर और मरीज जान बचाकर भागे। गनीमत यह रही कि किसी को भी चोट नहीं लगी। जानकारी के अनुसार बुधवार सुबह 11 बजे एक मरीज को सीटी स्कैन के लिए लाया गया। अभी इसका सीटी स्कैन शुरू ही हुआ था कि अचानक मशीन से धुआं निकलने लगा। कर्मचारियों ने मरीज को तुरंत बाहर निकाला। 
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आग की लपटें देख सभी मशीन से दूर हो गए। अभी स्विच ऑफ कर खराबी की जांच शुरू ही हो रही थी कि मशीन में जोरदार धमाका हो गया। आवाज सुनकर विभाग के अंदर और बाहर अफरातफरी मच गई।  अस्पताल प्रबंधन के अनुसार आगजनी की घटना से किसी भी कर्मचारी या मरीज को चोटें नहीं लगी हैं। लेकिन करोड़ों रुपये की मशीन खराब हो गई है।

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सामने आई लापरवाही, जा सकती थी जान

blast in citi scan machine at igmc shimla

हादसे ने अस्पताल प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। बताया जा रहा है कि इस मशीन में काफी दिनों से खराबी आ रही थी। लेकिन अस्पताल प्रबंधन इसे ठीक करवाने या बदलने की जहमत नहीं उठा पाया। बिजली से चलने वाली इस मशीन में करंट लगने की सबसे ज्यादा संभावना रहती है।

शार्ट सर्किट के चलते यदि मशीन में करंट दौड़ जाता तो मरीज की जान जा सकती थी। सवाल उठ रहे हैं कि प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में इस तरह की लापरवाही का आखिर कौन जिम्मेदार है।

रोजाना 40 से ज्यादा मरीजों का होता है सीटी स्कैन 
अस्पताल में रोजाना करीब 40 मरीजों का सीटी स्कैन होता है। इसमें ब्रेन, स्पाइन और चेस्ट जैसे स्कैन किए जाते हैं। 24 घंटे सीटी स्कैन की सुविधा दी जाती है। यह मशीन लगातार काम करती है। लेकिन अब मशीन खाक होने से अगले कुछ दिन सीटी स्कैन की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पाएगी।

सीटी स्कैन मशीन में आग लगी है। मशीन के अंदर बैटरी में शार्ट सर्किट हुआ, जिससे यह आग लगी। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने स्विच ऑफ कर दिया था ताकि शार्ट सर्किट ज्यादा न हो। किसी को चोटें नहीं लगी हैं।-डॉ. रमेश चंद, चिकित्सा अधीक्षक आईजीएमसी

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