Himachal BJP: चुनाव से पहले पीके धूमल के विवाह की सालगिरह के बहाने खेमेबंदी पाटने की कोशिश
सीएम जयराम ठाकुर, कई मंत्री, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप समेत पार्टी के सभी प्रमुख नेता सोमवार को हमीरपुर में धूमल के घर में उनकी शादी की सालगिरह के जश्न में शामिल हुए।
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विधानसभा चुनाव से चंद महीने पहले पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के विवाह की 50वीं सालगिरह भाजपा की खेमेबंदी को पाटने का बहाना बनी। सीएम जयराम ठाकुर, कई मंत्री, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कश्यप समेत पार्टी के सभी प्रमुख नेता सोमवार को हमीरपुर में धूमल के घर में उनकी शादी की सालगिरह के जश्न में शामिल हुए। दरअसल, चुनाव से पहले धूमल फैक्टर को भाजपा का सत्तासीन खेमा अनदेखा नहीं कर पाएगा। दिल्ली से भी ऐसा इशारा है। पिछला विधानसभा चुनाव भी भाजपा ने धूमल को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाकर जीता था। धूमल के चुनाव हारने पर जयराम मुख्यमंत्री बने थे। हमीरपुर पहुंची भाजपा नेताओं की फौज से जाहिर है कि मिशन रिपीट के लिए भाजपा को धूमल की जरूरत महसूस होने लगी है। इसके चलते प्रदेश भाजपा सरकार को 23 मई को प्रस्तावित मंत्रिमंडल की बैठक तक रद्द करनी पड़ी। हालांकि, सीएम जयराम ठाकुर ने धूमल के पांव छूटकर शिष्टाचार भी जाहिर किया।
दो बार मुख्यमंत्री रहे प्रेम कुमार धूमल के पास आज भी प्रभावशाली समर्थकों की एक बड़ी फौज है। तत्कालीन हिमाचल भाजपा प्रभारी नरेंद्र मोदी की पसंद से ही वह पहली बार 1998 में मुख्यमंत्री बने। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा खुद उनके मुख्यमंत्री काल में उनकी कैबिनेट के मंत्री रहे हैं। हालांकि, नड्डा मंत्री रहते दिल्ली की सियासत की ओर रुखसत हुए थे। जयराम सरकार के पिछले साढ़े चार सालों में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल हाशिये पर चले गए। हमीरपुर जिले में प्रेम कुमार धूमल के कई बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट खटाई में पड़े हैं। खुद धूमल की लिखी कई चिट्ठियों को सचिवालय में गंभीरता से नहीं लेने की चर्चा भी रही। कांग्रेस चुनाव प्रचार कमेटी के चेयरमैन सुखविंद्र सुक्खू ने गत दिवस हमीरपुर में आयोजित रैली में कहा था कि जलशक्ति विभाग के अधिकारी धूमल का फोन तक नहीं उठाते और उनके कहने पर पानी के नल तक नहीं लग रहे। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस को जवाब देने के लिए एक सियासी रणनीति के तहत प्रदेश सरकार धूमल की सालगिरह के बहाने हमीरपुर पहुंची। हमीरपुर पहुंच कर सरकार ने संकेत देने के प्रयास किए हैं कि भाजपा एकजुट है। भाजपा के थिंक टैंक विपक्ष के हाथों को कोई ऐसा मुद्दा नहीं देना चाहते, जिससे भाजपा को आने वाले चुनावों में नुकसान झेलना पड़े।