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सिविल अस्पताल का दर्जा घटाने पर सदन में हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 11 Mar 2016 08:47 AM IST
सार
- स्वास्थ्य मंत्री के जवाब पर भाजपा नेताओं ने लगाया झूठ बोलने का आरोप
- पिछली सरकार में शाहपुर को दिया गया था सिविल अस्पताल का दर्जा
- फिजिकल रिपोर्ट आने पर दर्जा बढ़ाने की बात कर मामले को संभाला
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शाहपुर से विधायक और पूर्व मंत्री सरवीण चौधरी
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
पिछली भाजपा सरकार के दौरान अपग्रेड शाहपुर के सिविल अस्पताल को डीग्रेड करने के मामले को लेकर वीरवार को सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दल के विधायकों ने सरकार के इस फैसले को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कदम बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की।
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साथ ही स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह पर गलत जानकारी देकर सदन को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री ने ग्राउंड रिपोर्ट आने पर इस मुद्दे पर कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद भी हालात सामान्य न होने पर विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।
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वीरवार को शाहपुर से विधायक और पूर्व मंत्री सरवीण चौधरी ने शाहपुर सिविल अस्पताल का दर्जा घटाने का मामला सदन में उठाया। सरवीण का आरोप था कि पिछली सरकार में सीएचसी शाहपुर को सिविल अस्पताल बनाने की अधिसूचना जारी की लेकिन राजनीतिक द्वेष भावना के चलते वर्तमान सरकार ने इस अस्पताल को डीग्रेड कर दिया।
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इसकी वजह से स्थानीय लोगों के अलावा नेशनल हाइवे से गुजरने वाले लोगों को हादसा होने के समय स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने जरूरत के आधार पर इसे डीग्रेड करने की बात कही तो विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। इस बीच सरवीण ने एसडीएम कार्यालय को लेकर भी सवाल उठाया, जिस पर कौल सिंह सही जवाब नहीं दे सके।
विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाते हुए स्वास्थ्य मंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए माफी मांगने की मांग शुरू कर दी। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष के दखल और कौल सिंह द्वारा ग्राउंड रिपोर्ट मंगाकर उसके आधार पर कार्रवाई का आश्वासन देकर मामला शांत कराया।
ओवर स्मार्ट हो जाते हैं इनके मंत्री- हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने राज्य सरकार के मंत्रियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कहा कि सरकार के ज्यादातर मंत्री स्मार्ट बनने की कोशिश करते हैं और कई बार ओवर स्मार्ट बनने के चक्कर में गलती कर देते हैं।