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राज्यपाल हटाने के लिए भाजपा ने बढ़ाया दबाव

Thu, 22 May 2014 09:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 22 May 2014 09:07 AM IST
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BJP increased pressure to remove governor

केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने से पहले ही हिमाचल भाजपा ने राज्यपाल उर्मिला सिंह को हटाने के लिए दबाव बढ़ा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ एचपीसीए केस में एक दिन के भीतर अभियोजन मंजूरी देने के बाद से ही राज्यपाल भाजपा के निशाने पर हैं।

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उर्मिला सिंह ने 26 जनवरी 2010 को राज्यपाल का पद ग्रहण किया था। उनका कार्यकाल जनवरी 2015 तक है। यानी अभी करीब 7 महीने शेष हैं। लेकिन, भाजपा चाहती है कि उन्हें बदलवाकर सरकार को ये पहला संदेश दिया जाए कि केंद्र की सत्ता में बदलाव हो गया है।
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हालांकि, पार्टी के ही कुछ सूत्र मान रहे हैं कि 2010 में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का फैसला इसमें रोड़ा बन सकता है। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मात्र सरकार बदलने से राज्यपाल नहीं हटाए जा सकते, इसके पीछे ठोस कारण होने चाहिए।
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राज्यपाल ने सरकार के दबाव में ‌लिया फैसला: दत्त

BJP increased pressure to remove governor

एक तर्क यह भी है कि जिन राज्यपालों का कार्यकाल कुछ महीनों का है, उन्हें न बदला जाए। इस सबके बावजूद राज्य भाजपा इकाई उर्मिला सिंह को और झेलने के पक्ष में नहीं है।

भाजपा प्रवक्ता गणेश दत्त कहते हैं कि हम संवैधानिक पदों की गरिमा को समझते हैं, लेकिन राज्यपाल ने इसे नहीं समझा। कोई भी राज्यपाल 1874 पेज की चार्जशीट को एक दिन में पढ़कर फैसला नहीं ले सकता। नेता प्रतिपक्ष धूमल के खिलाफ ये फैसला राज्यपाल ने सरकार के दबाव में आकर जल्दबाजी में लिया।

हमने उपयुक्त स्थान पर ये बातें रख दी हैं। वह कहते हैं कि 2004 में सत्ता में आई यूपीए सरकार ने विष्णु कांत शास्त्री जैसे संत आदमी को राज्यपाल पद से हटा दिया था। अब उर्मिला सिंह को भी चाहिए कि वह खुद ही पद छोड़ दें। क्योंकि जिस सरकार ने उन्हें नियुक्त किया था, वह तो जा चुकी है। नैतिकता भी यही कहती है।

एचपीसीए ने भी भड़ास निकाली

BJP increased pressure to remove governor

एचपीसीए के प्रवक्ता संजय शर्मा कहते हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान एचपीसीए केस में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ इसलिए झूठा केस बनाया गया, ताकि अनुराग ठाकुर को हराया जा सके।

इसमें भागीदार बनकर राज्यपाल उर्मिला सिंह ने कांग्रेस पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए पद और राजभवन का प्रयोग किया है।

मुख्यमंत्री से तो हम किसी नैतिकता की उम्मीद करते नहीं हैं, लेकिन राज्यपाल से अब भी उम्मीद है। वह कांग्रेस सरकार की दुर्भावना का हिस्सा बनीं हैं, इसलिए पद छोड़ना चाहिए।

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