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'सरकार ने चहेती फर्म को दे दिया दाल का टेंडर'

Wed, 01 Jul 2015 11:21 PM IST
Updated Wed, 01 Jul 2015 11:21 PM IST
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bjp general secretary randhir sharma press conference in shimla.

भाजपा महासचिव रणधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार ने दाल चना के टेंडर में चहेतों को करोड़ों का फायदा पहुंचाया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्य आपूर्ति निगम ने 16 अप्रैल को पहली बार दालों के टेंडर कर दिए। चहेती कंपनी की औपचारिकताएं पूरी नहीं थीं। इस कारण टेंडर रद्द किया। दूसरी बार टेंडर किया गया तो रेट ठीक न होने से इसे रद्द कर दिया। तीसरी बार कंपनी को 69.93 रुपये के हिसाब से दाल चना का टेंडर दिया, जबकि दो दिन पहले खाद्य आपूर्ति निगम ने आंगनबाड़ी केंद्र में दी जाने वाली दाल चना के टेंडर किए। इसमें दाल चना का रेट 56.16 रुपये किलो के हिसाब से हुआ है।

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उन्होंने प्रेसवार्ता में कहा कि यह पहली बार हुआ है कि 9 दालों के टेंडर किए गए। इससे पहले भी टेंडर हुए हैं, वह तीन दालों के किए गए हैं। उन्होंने सरकार से दालों के टेंडर रद्द करने की मांग की है। चेतावनी ही कि अगर सरकार दालों के टेंडर रद्द नहीं करती है तो भाजपा आंदोलन करेगी। दालों के रेट ज्यादा होने पर कंपनी ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और खाद्य आपूर्ति के एमडी को भी शिकायत की है। उन्होंने पीडीएस के तहत दाल चना 56.16 रुपये प्रति किलो के हिसाब से देने की हामी भरी है।

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'चार्जशीट पर सीएम और मंत्री क्यों नहीं गए कोर्ट'

bjp general secretary randhir sharma press conference in shimla.

रणधीर शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने चार्जशीट को लेकर कोर्ट में जाने की बात कही थी। डेढ़ सप्ताह हो गया है, लेकिन अभी तक कोई कोर्ट नहीं गया। इससे साफ जाहिर है की भाजपा की चार्जशीट सही है। चार्जशीट में तथ्यों के आधार पर आरोप लगाए गए थे। पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ाए जाने से हिमाचल में हर वस्तु महंगी हो जाएगी। उन्होंने इस फैसले को जनविरोधी करार दिया।

बाली बोले, रेट कम था तो क्यों नहीं भरा टेंडर- खाद्य नागरिक एवं उपभोक्ता मामले मंत्री जीएस बाली ने कहा कि अगर कंपनी कम रेट पर दाल चना देने को तैयार थी तो कंपनी ने क्यों टेंडर में भाग नहीं लिया। खाद्य आपूर्ति निगम चाहता था कि इससे भी कम रेट वाली कंपनी मिले। अब दालों के टेंडर करने के बाद अगर भाजपा इस तरह की बयानबाजी कर रही है तो वह गलत है। खाद्य आपूर्ति निगम ने नहीं, बल्कि मंत्रिमंडल बैठक में मामला ले जाने के बाद रेट तय हुए हैं।

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