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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   BJP Councellor Underground after winning MC Shimla Election.

MC Shimla: चुनाव जीतते ही गायब हो गए भाजपा पार्षद, सता रहा ये डर

Mon, 19 Jun 2017 01:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 19 Jun 2017 01:11 PM IST
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BJP Councellor Underground after winning MC Shimla Election.

नगर निगम शिमला पर कब्जा करने में भाजपा किसी भी तरह की चूक करने के मूड में नहीं है। एक निर्दलीय के भरोसे बहुमत का आंकड़ा हासिल करने वाली भाजपा ने जीते प्रत्याशियों को प्रदेश से बाहर सुरक्षित ठिकाने पर रखा है।

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प्रदेश लीडरशिप अपने किसी प्रत्याशी को शपथ ग्रहण से पहले शिमला में दाखिल नहीं होने देगी। सूत्रों की माने तो सेंधमारी की डर से पार्टी ने अपनी जीती टीम को पंचकूला में एक निजी परिसर में रखा है।
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हालांकि पार्टी इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है। 19 जून को शपथ ग्रहण समारोह से पहले ही भाजपा के जीते प्रत्याशी शिमला पहुंचेंगे। कांग्रेस के मुकाबले भाजपा को मामूली अंतर से निगम चुनाव में मिली जीत के बाद अब उनकी कोशिश मेयर की कुर्सी पर कब्जा करने की है।

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पार्टी ने गुपचुप प्रदेश से बाहर भिजवाए पार्षद

BJP Councellor Underground after winning MC Shimla Election.

शनिवार को पार्टी प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक के बाद सभी जीते प्रत्याशियों को चुनाव प्रभारी राजीव बिंदल की कमान में सोलन पहुंचाया गया। पहले भाजपा उन्हें हिमाचल के सोलन में सुरक्षित रखना चाहती थी, लेकिन पार्टी को छिटकने का इतना डर था कि उन्हें पंचकूला शिफ्ट किया गया।

हरियाणा में भाजपा की सरकार होने से पार्टी के लिए यह सबसे सुरक्षित दांव लगा। सूत्रों के मुताबिक पार्टी को खरीद फरोख्त का भी डर है, जिसकी आशंका नेताओं ने जीत के तुरंत बाद जताई थी।

हालांकि पार्टी के नेता प्रत्याशियों के ठिकाने के संबंध में कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं। इस संबंध में चुनाव प्रभारी राजीव बिंदल से संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। 

भाजपा का निर्दलीय सुरक्षित
निर्दलीय प्रत्याशी राकेश शर्मा पर कांग्रेस डोरे नहीं डाल पाई, जिसे भाजपा ने राहत की सांस ली है। राकेश शर्मा के खिलाफ पार्टी समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव में उतरने की कार्रवाई को पार्टी ने वापस ले लिया है। पार्टी यह संदेश देने की कोशिश में है कि सभी 18 उसके जीते प्रत्याशी हैं।

केंद्र की सलाह पर सेफजोन
भाजपा के रणनीतिकार का गणित निगम चुनाव के नतीजों से बिगड़ने के बाद केंद्रीय नेताओं का दखल शुरू हुआ। विधानसभा चुनाव के लिहाज से पार्टी के लिए निगम पर कब्जा भाजपा की सियासी मजबूरी है। निर्दलीय को मिलाने के बाद भी आंकड़ा कांग्रेस से दो ही अधिक है । ऐसे में खेमे से एक के खिसके से सारा मामला पलट सकता था। 

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