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मंडी उपचुनाव में आसान नहीं भाजपा-कांग्रेस की राह, सुखराम परिवार की चाल पर निगाहें

Sat, 09 Oct 2021 12:01 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, मंडी
अमर उजाला नेटवर्क, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Sat, 09 Oct 2021 12:01 PM IST
सार

मंडी में आश्रय शर्मा वरिष्ठ कांग्रेस नेता कौल सिंह ठाकुर के खिलाफ सोशल मीडिया में जमकर भड़ास निकाल रहे हैं। महेश्वर सिंह और अनिल शर्मा भाजपा की परेशानी बढ़ा सकते हैं। उपचुनावों में सुखराम परिवार की चाल पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि अब तक न तो आश्रय शर्मा कांग्रेस के कार्यक्रमों में दिखे हैं, न ही अनिल भाजपा के साथ मैदान में उतरे हैं। 

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BJP-Congress path is not easy in Mandi by election, an eye on Sukhram family's move
भाजपा-कांग्रेस

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के मंडी संसदीय उपचुनाव में कांग्रेस और भाजपा के लिए जीत की राह आसान नहीं होगी। टिकट न मिलने से नाराज धड़े दोनों पार्टियों की जीत की राह में कांटे बन सकते हैं। आश्रय शर्मा वरिष्ठ कांग्रेस नेता कौल सिंह ठाकुर के खिलाफ सोशल मीडिया में जमकर भड़ास निकाल रहे हैं। महेश्वर सिंह और अनिल शर्मा भाजपा की परेशानी बढ़ा सकते हैं। उपचुनावों में सुखराम परिवार की चाल पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि अब तक न तो आश्रय शर्मा कांग्रेस के कार्यक्रमों में दिखे हैं, न ही अनिल भाजपा के साथ मैदान में उतरे हैं। 

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उधर, शुक्रवार को नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व सांसद प्रतिभा वीरभद्र सिंह ने नामांकन पत्र भरा और सेरी मंच पर हुंकार भरी। इस कार्यक्रम से पूर्व प्रत्याशी और प्रदेश महासचिव आश्रय शर्मा नदारद रहे। वह सोशल मीडिया में वीडियो जारी कर कौल सिंह ठाकुर के बहाने टिकट कटने की नाराजगी जताते दिखे। वीडियो के माध्यम से उन्होंने कहा कि मंडी जिले को मुख्यमंत्री के रूप में मान-सम्मान वर्षों पहले मिल जाना था, यदि वरिष्ठ कांग्रेस नेता कौल सिंह ने पंडित सुखराम का साथ दिया होता और जिले की पीठ न लगवाई होती।
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कहा कि कांग्रेस ने नया नियम बनाया है कि जो चुनावों में कामयाब नहीं हो रहा है, वहां दूसरे को मौका दिया जा रहा है। यदि यह नियम मुझ पर लागू होता है तो आने वाले विधानसभा चुनावों में कौल सिंह और उनकी बेटी चंपा ठाकुर पर भी लागू होना चाहिए। कौल सिंह 8 हजार और उनकी बेटी 10 हजार मतों से हारी हैं। पार्टी को अब उम्र का तकाजा देखते हुए कौल सिंह ठाकुर को आराम करने और द्रंग से किसी युवा नेता को आगे आने का मौका देना चाहिए। उधर, बीते वीरवार को भाजपा की नामांकन रैली में महेश्वर सिंह का जनसभा से उठकर चले जाना और टिकट न मिलने का जिक्र अपने अंदाज में करना कई सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, मंच से वह सीएम की इजाजत लेकर ही निकले हैं। अनिल का भी भाजपा के साथ उपचुनाव में अब तक न उतरना भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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