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हिमाचल में नहीं काट पाएंगे पक्षियों के घोंसले वाले पेड़
Mon, 16 Dec 2019 12:19 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंडी
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 16 Dec 2019 12:19 PM IST
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- फोटो : सोशल मीडिया
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हिमाचल में अब सड़कों, भवनों और अन्य विकास कार्यों के निर्माण में ऐसे पेड़ों को काटने की मंजूरी नहीं मिलेगी, जिनपर चिडि़यों और अन्य पक्षियों के घोंसले होंगे। निर्माण के दौरान न तो जलस्रोत नष्ट होंगे और न ही ऐसे वन उजाड़े जाएंगे जहां जीवों का ज्यादा वास हो। जैव विविधता अधिनियम के तहत ऐसा पेड़ कटान न हो इसके लिए जैव प्रबंधन समितियां इस पर नजर रखेंगी। किसी भी स्थानीय सोसायटी या लोगों की ओर से अगर ऐसे मामले ध्यान में लाए जाते हैं तो समितियां तुरंत एक्शन लेंगी।
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मंडी नगर परिषद में इस पर काम शुरू हो गया है। नगर परिषद मंडी के कार्यकारी अध्यक्ष बीआर नेगी ने बताया कि हाल ही में देहरादून में जैव विविधता प्रबंधन को लेकर आयोजित कार्यशाला में इसका खुलासा किया है। कोई भी ऐसा पेड़ नहीं काटा जाएगा, जिनपर चिडि़यों के घोंसले हों या जिस पर अन्य पक्षी निवास करते हों। अंधाधुंध कटान से पेड़-पौधों की ही नहीं, बल्कि वन्य प्राणियों की भी अनेक प्रजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं।
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31 जनवरी तक होगा समितियों का गठन
जैव विविधता अधिनियम-2002 के तहत प्रबंधन समितियों के गठन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल पहले ही सख्त है। 31 जनवरी, 2020 तक हर स्थानीय निकायों में इन समितियों के गठन का आदेश हैं। आदेश का पालन न करने वाले निकायों से 10 लाख रुपये प्रति माह दंड वसूला जाएगा।
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सात सदस्य होंगे, यह होगा काम
पंचायतों, पंचायत समितियों, जिला परिषदों और सभी शहरी निकायों के स्तर पर सात सदस्यीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों के गठन किया जाएगा। इसमें एक चेयरमैन के अलावा एक सचिव तथा दो महिला सदस्य, एक एससी एवं एसटी और दो अन्य वर्ग के सदस्य होंगे। समिति का कार्य जैव विविधता का संरक्षण करना है।
27 नवंबर को हुई है वीडियो कांफ्रेंसिंग
हिमाचल में 27 नवंबर को अतिरिक्त मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी जिलाधीशों और स्थानीय निकायों तथा हितधारक विभागों के प्रतिनिधियों से इस पर वीडियो कांफ्रेंसिंग की है। इसमें 31 जनवरी, 2020 तक हर स्थानीय निकायों में समितियों के गठन का आदेश दिया है।