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पीने योग्य बनेगा ब्यास नदी का पानी, कवायद शुरू
Mon, 21 Jan 2019 10:30 AM IST
अरविन्द ठाकुर
रोशन ठाकुर, अमर उजाला, कुल्लू
रोशन ठाकुर, अमर उजाला, कुल्लू
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 21 Jan 2019 10:30 AM IST
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रोहतांग दर्रे से निकलने वाली करीब 470 किलोमीटर लंबी ब्यास नदी का पानी अब पीने योग्य बनाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसकी कवायद शुरू कर दी है। ब्यास सहित 21 सहायक नदियों-नालों से सैंपल भरे गए हैं।
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पर्यटन नगरी मनाली में 15, जिला मुख्यालय ढालुपर में सबसे अधिक 31, पार्वती वैली के मणिकर्ण और बंजार घाटी से सैंपल लिए गए हैं, जो सबसे अधिक ब्यास नदी को दूषित कर रहे हैं। इसके लिए जिला स्तर पर स्पेशल इन्वायरमेंट सर्विलांस टास्क फोर्स का गठन भी किया गया है।
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ब्यास की धारा अधिक प्रदूषित होने से इसकी बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) चार से छह के बीच है। अभी तक इस पानी को नहाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन बोर्ड ने बीओडी को तीन से कम लाने के लिए अलग-अलग चरणों में काम शुरू किया है।
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बोर्ड के सदस्य सचिव आरके प्रूथी ने कहा कि ब्यास नदी का बीओडी अभी तीन से छह के बीच है। इसे तीन से कम दो तक लाना है ताकि ब्यास का पानी पीने लायक हो। उन्होंने बताया कि अंत में एक रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी जाएगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों पर यह सब किया जा रहा है।
इन जगहों से लिए पानी के सैंपल
ब्यास नदी के किनारे कुल्लू-मनाली शहर, ठोस अपशिष्ट स्थलों के साथ होटल, उद्योग, मनलसू नाला, एलाइन दुहांगन, बैरागान, डोबा नाला, सरवरी, पार्वती, बजौरा, तीर्थन आदि से पानी के सैंपल लिए गए हैं।