..तो अब सिर मुंडवा देगा भाजपा का ये दबंग नेता
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नाहन की जनहित समस्याओं को लेकर तीन दिन के अनशन पर बैठे भाजपा के दबंग नेता राजीव बिंदल ने मांगें न मानने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दे दी है। उन्होंने कहा है कि अगर 45 दिन के भीतर पीडब्ल्यूडी ने 13 पुलों की डीपीआर तैयार नहीं की तो वह सिर मुंडवाकर अधीक्षक अभियंता लोनिवि कार्यालय के बाहर धरने पर बैठेंगे।
नाहन के विधायक और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राजीव बिंदल प्रशासन द्वारा विस क्षेत्र की लगातार हो रही अनदेखी से नाराज है। इसी कारण वह वीरवार से तीन दिनों के अनशन पर बैठ गए हैं।
नाहन के बड़ा चौक में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नाहन की दुर्दशा को ठीक करने के पीछे उनकी कोई राजनीति करने की मंशा नहीं है। अव्यवस्था का आलम यह है कि प्रतिदिन पेयजल के लिए हाहाकार मचा हुआ है।
पानी की समस्या को लेकर कर रहे हैं आंदोलन
बिंदल ने कहा कि नाहन क्षेत्र में हजारों लोग बिना पानी के भटक रहे हैं। नाहन विधानसभा क्षेत्र के 100 से अधिक गांव सड़कों से महरूम है। इन सड़कों की डीपीआर लोनिवि और फॉरेस्ट के झगड़े में फंसी हुई हैं।
यही वजह है कि अब उन्होंने लोनिवि से डीपीआर पास करवाने के लिए सिर मुंडवाने की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि नाहन क्षेत्र की अनदेखी का आलम यह है कि यहां अभी तक नाबार्ड के 15 से 16 करोड़ रुपये विकास योजनाओं पर खर्च हुए हैं।
वहीं विधानसभा क्षेत्र नालागढ़, संतोषगढ़, पांवटा, सोलन आदि में 80 से 100 करोड़ खर्च हो चुके हैं। कुछ विधानसभा क्षेत्रों में तो नाबार्ड ने कैंप तक लगा दिए हैं। यहां नाबार्ड का पैसा खर्च नहीं होने का प्रमुख कारण डीपीआर पेंडिंग है।
सड़कों और पुलों की डीपीआर तैयार करने को कहा
बिंदल ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में नाहन क्षेत्र की सात सड़कें और चार पुल आते हैं। जिनकी आज तक डीपीआर तैयार नहीं हुई। उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग और आईपीएच विभाग के प्रधान सचिव शिमला में नहीं, बल्कि नाहन आएं और यहां के विकास कार्यों की जांच करें।
उन्होंने कहा कि अनशन करना उनका कोई शौक नहीं, बल्कि वह जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। जनता के अधिकारों की प्राप्ति के लिए वह अनशन पर बैठे हैं। राजीव बिंदल ने कहा कि क्षेत्रवासियों के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
उन्होंने सवाल किया कि नाहन विस क्षेत्र हिमाचल का अभिन्न अंग है। फिर भी यह सर्वाधिक पिछड़ा क्यों है। उन्होंने डेढ़ वर्ष में चार हजार समस्याओं के 1400 पत्र विभिन्न विभागों को दिए हैं। जिनका समाधान जनहित में होना चाहिए। मगर सरकार और प्रशासन लगातार इस क्षेत्र की अनदेखी कर रहे हैं।