मजदूरों के हौंसले तो जीत गए मगर हार गया आपदा प्रबंधन
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वे जिन्दगी की जंग जीते तो केवल अपने हौसले से। बिलासपुर की डिप्टी कमिश्नर की ये मेहरबानी ही थी कि उन्होंने अपने संसाधनों से दो दिन के भीतर टनल में फंसे मजदूरों से न केवल राब्ता कायम किया बल्कि उन्हें आठ दिन तक जिंदा रखा।
लेकिन जिस जमाने में हम चांद के कई चक्कर लगा चुके हों वहां चट्टान भेद कर केवल 45 मीटर सुराख करने में दस दिन लग जाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। क्या हमारा हिमाचल ऐसी मुसीबतों से निपटने के लिए तैयार है? यकीनन इसका जवाब नहीं में होगा।
सख्त चट्टानों को भेदने के लिए हमारे पास कारगर मशीनें नहीं हैं। इसके लिए हमें राजस्थान का मुंह देखना पड़ता है। ड्रिल करने वाली मशीन की बिड टूट जाए तो उसके लिए हमें स्पेयर पार्ट के लिए दिल्ली जाना पड़ता है। हमारे पास विशेषज्ञों की कोई एजेंसी नहीं जो देखे कि टनल या अन्य खतरनाक साइट पर हमारे मजदूर जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं।
क्या कार्य स्थल पर उनकी सुरक्षा के जरूरी इंतजाम हैं? क्या टनल में सिर्फ हैलमेट पहन कर सिर पर गिरने वाली मुसीबत से बचा जा सकता है? हमारे सूबे के भौगोलिक हालात ऐसे हैं जहां कभी भी ऐसा हादसा हो सकता है।
सरकार को लेना होगा सबक
तमाम बिजली प्रोजेक्टों में ऐसी टनलों पर काम चल रहा है। छुटपुट हादसे होते भी रहते हैं। लेकिन ये अपने आप में एक भयानक हादसा था। उस रात टिहरा में फोर लेन सड़क बनने के दौरान रात टनल में मलबा गिरा और तीन मजदूर उसमें फंस गए। खैरियत है कि ये हदसा तब हुआ जब मजदूरों की शिफ्ट बदली थी और अधिकांश मजदूर टनल से बाहर आ चुके थे।
वर्ना हालात और भी बदतर होते। हादसे के तीसरे दिन एनडीआरएफ यानी नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और सेना की टीम घटनास्थल पर पहुंची। लेकिन मुआयना करके वापस चली गई। कहा-अभी उनकी जरूरत नहीं। आखिर क्यों? यह अपने आप में अजीब बात है। यह ठीक है कि बीआरओ पहाडों के बीच सुरंग बनाने में माहिर है लेकिन यहां तीन जिन्दगियों का सवाल था।
फिर सरकार सेना की मदद क्यों नहीं लेना चाहती थी? जबकि ये जाहिर है आपदा मामलों में तेज एक्शन और निर्णय लेने में सेना और एनडीआरएफ की अपनी अलग ही पहचान है। ऐसे कई सवाल हैं जिनसे सरकार को दो चार होना पड़ेगा। इस हादसे को सरकार को एक सबक के रूप में लेना होगा। राज्य आपदा प्राधिकरण का हजारों करोड़ का बजट सिर्फ सड़क बनाने के लिए नहीं है। आपदा प्रबंधन के लिए हमारे पास सारे अत्याधुनिक उपकरण होने चाहिए।