जीत गई जिंदगी, 10वें दिन टनल से बाहर निकाले गए दोनों मजदूर
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दस दिन....दस रातें और 211 घंटे 47 मिनट। जमीन के नीचे घुप अंधेरी टनल में जिंदगी के लिए जंग लड़ रहे दो मजदूर आखिरकार जिंदा लौट आए। मौत को मात देकर दस दिन के बाद सूरज देखा। टीहरा टनल में फंसे मणि राम और सतीश तोमर को एनडीआरएफ की रेस्क्यू टीम ने बाहर निकाला।
बाहर निकलते ही दोनों मजदूरों ने हाथ हिलाकर सबका अभिवादन भी किया। वहीं टनल में फंसे तीसरे मजदूर हिरदा राम का कोई सुराग नहीं लग पाया है। जिला प्रशासन और एनडीआरएफ ने उसके लिए अब सर्च ऑपरेशन चलाने की बात कही है।
42 मीटर होल कर बाहर निकाले
जिला प्रशासन, बीआरओ के नेतृत्व में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में दसवें दिन बड़ी कामयाबी मिली। मुरझाए चेहरों पर अचानक रौनक लौट गई। टनल में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए सोमवार सुबह से ही तैयारियां चल रही थीं। सुबह 9:50 बजे एनडीआरएफ ने मोर्चा संभाला।
आधुनिक ड्रिलिंग मशीन से डाले गए लगभग 42 मीटर होल से एनडीआरएफ का जवान टनल में उतरा और दोनों मजदूरों को बारी-बारी रस्से से बांध कर ऊपर भेजा। सबसे पहले मणि राम 4:09 बजे घुप अंधेरी टनल से बाहर पहुंचा। सुरेश तोमर 4:27 बजे बाहर आया। दोनों ने हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया।
दोनों को तुरंत एंबुलेंस से पहुंचाया अस्पताल
इस दौरान पूरा माहौल जोश से भर गया। जय मां ठाई देवी, जय माता दी और विश्वकर्मा भगवान के जयकारे से माहौल गुंजायमान हो गया। दोनों के बाहर निकलने के बाद इंजीनियरों और वर्करों ने एक-दूसरे को गले मिलकर बधाई दी। वहीं मजदूरों के परिजनों की खुशी का भी ठिकाना नहीं रहा।
बाहर निकालने के बाद दोनों को 108 एंबुलेंस (एचपी-63-5801) से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जहां दोनों का उपचार चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों मरीज स्वस्थ है। डीसी मानसी सहाय ठाकुर ने कहा कि रेस्क्यू अभी जारी है। तीसरे मजदूर की तलाश की जा रही है। लेकिन, उसका पता नहीं चल पाया है।
इस तरह निकाले गए मजदूर
एनडीआरएफ के सब इंस्पेक्टर नरेश ने 1.3 मीटर चौड़े होल से टनल में प्रवेश किया। सुबह वे टनल में उतरे। लेकिन, कंकरीट होने के कारण वह टनल के अंदर नहीं जा सके। करीब एक घंटे तक नरेश ने कंकरीट और सरिये की जाली को हाथ से चलने वाली ड्रिल मशीन से काटने की कोशिश की। लेकिन, काबयाबी नहीं मिलने पर वह वापस आए।
इसके बाद आधुनिक ड्रिल मशीन से करीब दो घंटे तक ड्रिलिंग हुई शाम चार बजे फिर एनडीआरएफ ने मोर्चा संभाला। इस बार फिर नरेश वहां गए। नरेश ने करीब एक घंटे के अंतराल में दोनों मजदूरों को बाहर निकाल दिया। दोनों को केमलान मशीन से रस्सी के सहारे खींच कर बाहर निकाला गया।
12 सितंबर को हुआ था हादसा
12 सितंबर को टीहरा में टनल धंसने के कारण तीन मजदूर घुप अंधेरी टनल में फंस गए थे। हादसे के तुरंत बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो गया था। चुनौती भरे इस कार्य को पूरा करने में रेस्क्यू टीम को दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा।
बद्दी से अग्निशमन विभाग की स्पेशल रेस्क्यू टीम भी पूरे उपकरणों सहित यहां पहुंच गई थी। बीबीएमबी से भी रेस्क्यू टीम बुलाई गई थी।
मणि राम के हौंसले ने जीती जिंदगी की जंग
मंडी। घुप अंधेरी टनल में दस दिनों से मौत को मात दे रहे मणिराम के जिंदा बाहर निकालने की खबर सुनते ही नलवागी पंचायत के करेरी गांव में परिजन खुशी में झूमे उठे। इस बात की खबर मिलते ही गांव के लोग परिजनों को बधाई देने के लिए पहुंचे। मणिराम की माता बोधी देवी, पत्नी जयदासी, बेटी डोलमा और बेटा दिनेश कुमार दस दिनों तक अंधेरी टनल में रहे मणि राम के सुरक्षित रहने को देवी-देवताओं का आशीर्वाद मानते हैं। माता बोधी देवी बेटे की एक झलक पाने को बेताब है।
बालीचौकी उप तहसील की नलवागी पंचायत के करेरी गांव निवासी मणिराम के हौंसले ने मौत को मात दे दी। 12 सितंबर शनिवार को कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के लिए बिलासपुर के टीहरा में निर्माणाधीन टनल में मलबा गिरने से मणिराम समेत तीन मजदूर अंदर फंस गए थे। दस दिनों तक अंधेरी टनल में जिंदगी की जंग जीत कर बाहर निकले मणि राम के परिजनों को सोमवार का दिन ताउम्र याद रहेगा।
मणि राम की माता बोधी देवी और पत्नी जयदासी के अनुसार भगवान की कृपा से ही मणिराम आज सुरक्षित हैं। बस उस वक्त का इंतजार बाकी है जब मणि राम घर पहुंचेंगे। मणि राम की पत्नी जयदासी सरकारी स्कूल में मिड डे मील कर्मी है। बेटी डोलमा और बेटा दिनेश कुमार भी पापा के सुरक्षित टनल से निकलने की खुशी में भावुक हो गए।
मणि राम के घर पहुंच कर लोगों ने परिजनों को बधाई दी। शेष राम मंडयाल, लुदरमणि, पवन कुमार, भूपेंद्र कुमार, रमेश चंद, बलवीर सिंह, मनोज कुमार ने कहा कि मणि राम के सुरक्षित बच निकलने पर खुशी जताते हुए बचाव दल और प्रशासन के प्रयासों की सराहना की है।
फरिश्ता बनकर पहाड़ से उतरा खेबनहार
राजकुमार सेन, टीहरा (बिलासपुर)। 9 दिनों से जमीन के नीचे जिंदगी की आस लगाए बैठे मजदूरों के खेबनहार (एनडीआरएफ के जवान) पहाड़ से फरिश्ता बनकर उतरे। मौत से जंग लड़ रहे टिहरा सुरंग में 12 सितंबर से फंसे मजदूरों सतीश व मणिराम को निकालने के लिए एनडीआरएफ का जवान उनके पास पहुंचा, तो मजदूरों ने उसे जफी डाल दी। मजदूर एनडीआरएफ के जवान अशोक को बोले -संकट से निकालने वाले तुम हो हमारे असली भगवान।
सोमवार दोपहर को लगभग तीन से चार बजे जब लोगों की भीड़ टकटकी लगाकर मजदूरों को बाहर निकलते देख रही थी, तो सुरंग के भीतर फंसे मजदूर और एनडीआरएफ के जवान के बीच बातचीत हो रही थी। एनडीआरएफ के जवान अशोक के मुताबिक जब वह सुरंग में मजदूरों के समीप पहुंचे तो उनका चेहरा एकदम चमक गया।
मैंने पहली बार किया ऐसा ऑपरेशन
दस दिनों से मौत से जंग लड़ रहे मजदूरों को एक नया जीवन, एक नया सवेरा मिल गया। सोमवार सुबह से ही सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने की सबको आस बंधी थी। रेस्क्यू में सबसे पहले एनडीआरएफ का जवान नरेश पहाड़ी से उतरा। सर्च करके वापस लौटने पर नरेश ने और अधिक ड्रिलिंग करवाने की बात कही।
नरेश के अनुसार करवाई गई ड्रिलिंग में दो घंटे का समय लग गया। फिर उसके बाद वह पल आया, जिसका पिछले दस दिनों से सबको इंतजार था। कांस्टेबल अशोक ने कहा कि टनल में पानी जमकर भरा हुआ है। उन्होंने तीसरे मजदूर की भी तलाश की लेकिन, उसका कोई पता नहीं चल पाया है। टनल में अभी भी चट्टानें गिर रही हैं।
अशोक ने कहा कि उन्होंने कई रेस्क्यू ऑपरेशन किए हैं। कई लोगों की जानें बचाई है। इससे उसे दिली खुशी मिलती है। लेकिन, इस बार का ऑपरेशन पहले से खतरनाक। पहली बार वह जमीन के अंदर किसी टनल में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए उतरे। यह लम्हा उन्हें ताउम्र याद रहेगा। उन्होंने कहा कि उन्हें हर तरह की आपदा में रेस्कयू करने का ज्ञान है।
ऐ पहाड़ तू ही बता, हिरदा राम का पता
राजीव कश्यप, टीहरा (बिलासपुर)। टीहरा टनल में फंसे दो मजदूरों का निकालने के बाद रेस्क्यू टीम के लोग खुशी से झूम उठे। सतीश तोमर और मणि राम के परिजनों के चेहरों पर भी रौनक लौट आई। लेकिन, हिरदा राम का परिवार आज भी उन्हें पहाड़ों की चट्टानों में तलाश रहा है। आखिर कहां गया हिरदा राम। इसका जवाब शायद प्रशासन के पास भी नहीं है। हालांकि, प्रशासन को अभी भी हिरदा के जीवित होने की उम्मीद है। प्रशासन ने कहा है कि अभी रेस्क्यू खत्म नहीं हुआ है। रेस्क्यू ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा, जब तक हिरदा राम का पता नहीं चल जाता।
सोमवार का दिन मणि राम और परिजनों के साथ ही रेस्क्यू टीम के लिए खुशी का दिन था। सतीश व मणिराम के जिंदा बाहर निकलने से उनके परिजन व लोग खुशी से झूम रहे थे, वहीं सुरंग में फंसे हिरदा राम के बारे कोई जानकारी न मिलने से उनके परिजनों व रिश्तेदारों को खुशी के साथ गम भी सता रहा है। दस दिनों के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद अभी तक सुरंग में फंसे हिरदा राम की किसी को भी कोई जानकारी नहीं है। जिससे खुशी के साथ गम का माहौल भी टीहरा में रहा।
प्रशासन को जिंदा होने की उम्मीद, जारी रहेगा रेस्क्यू
दोनों मजदूरों से बात करने के लिए एनडीआरएफ का जवान कांस्टेबल अशोक टनल के अंदर दाखिल हुआ। टनल के भीतर जाकर उसने पहले तो दोनों के साथ संपर्क होने की बात कही और कहा कि वह उन्हें ऊपर भेज रहा है। उसने दोनों को रैप्लिंग करने वाली रस्सी से बारी-बारी ऊपर भेजा। बाहर निकलने पर अशोक ने बताया कि मणि राम घबराया हुआ था। लिहाजा, पहले उसे बाहर भेजा गया। इसके बाद सतीश ने उसे पूरी टनल में घुमाया।
तीसरे मजदूर को तलाशने की उन्होंने पूरी कोशिश की। लेकिन, वहां पर पानी बहुत भरा हुआ था। लिहाजा, उसका पता नहीं चल पाया। एनडीआरएफ के कमाडिंग ऑफिसर जयदीप सिंह बताया कि अभी रेस्क्यू जारी रहेगा। तीसरे मजदूर को तलाशने के लिए और तरीकों पर भी विचार किया जाएगा। डीसी मानसी सहाय ठाकुर ने कहा कि अभियान खत्म नहीं हुआ है। तीसरे व्यक्ति की भी तलाश की जाएगी। इधर, हिरदा राम के परिजनों को अभी भी उम्मीद है कि उनका अपना भी जल्द ऐसे ही वापस आएगा।
निकालो, निकालो, निकालो.... चिल्लाते रहे फंसे मजदूर
संजय शर्मा, टीहरा, घुमारवीं (बिलासपुर)। समय 9:50 बजे। दिन सोमवार। बिलासपुर टीहरा टनल में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए छेड़ा गया रेस्क्यू ऑपरेशन अंतिम दौर में भी चुनौतियों भरा रहा। मजदूरों को निकालने के लिए एनडीआरएफ एक जवान बोरिंग होल से नीचे उतरा, लेकिन टनल की कंकरीट उसकी राह में रोड़ा बन गई। जवान ने हाथ से चलने वाली छोटी ड्रिलिंग मशीन से कंकरीट को तोड़ने के अथक प्रयास किए, लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लगी।
लगभग एक घंटे टनल के ऊपर बनाए गए बोरिंग होल में कंकरीट को तोड़ने के लिए जुझता रहा। लेकिन, उसे खाली हाथ लौटना पड़ा। इस दौरान जवान की टनल में फंसे मजदूरों से बातचीत भी हुई। जवान जब टनल के बोरिंग होल से बाहर निकला, तो टनल के अंदर फंसे मजदूर माइक्रोफोन के पास आकर कहते रहे कि निकालो, निकालो, निकालो...।
एकाएक छा गई खामोशी
उनके इन शब्दों में टनल के अंदर कटे उनके कठिन दिनों का अहसास हुआ। वहां जुटी भीड़ एकाएक खामोश सी हो गई। 11:26 मिनट पर उसने कंकरीट को तोडने के लिए हाथ की मशीन से ड्रिलिंग शुरू की। लेकिन, 11:52 पर वे होल से बाहर आया और तमाम स्थिति के बारे में अपने अधिकारी व वहां मौजूद इंजीनीयिरों को जानकारी दी।
इसके बाद फिर आधुनिक ड्रिलिंग मशीन से कंकरीट को भेदना शुरू किया गया। शाम करीब 3:30 बजे फिर एनडीआरएफ ने मार्चा संभाला और एक घंटे के अंतराल में दोनों मजदूरों को बाहर निकाल दिया। इसके बाद वहां मौजूद लोग खुशी से झूम उठे। सभी ने एक-दूसरे को गले मिलकर बधाइयां दी। रेस्क्यू टीम ने भी आपस में हाथ मिलाए।
न रही थी भूख, खत्म हो गई थी प्यास, संकट में कटे दस दिन
अभिषेक सोनी, बिलासपुर। ....न भूख लग रही थी, प्यास भी खत्म हो गई थी। भाइयों के संकट में फंसने के बाद परिवार व रिश्तेदारों पर भी संकट आ पड़ा था। कुछ दिन तो घर के चूल्हे भी ठंडे रहे। परिजनों न अन्न व पानी भी छोड़ रखा था। जिंदा रहने की सूचना मिली, फिर कुछ उम्मीद जागी। सतीश तोमर के भाई विनोद तोमर ने बताया कि वह बहुत खुश हैं। अब घर जाकर शिरगुल देवता से मांगी मन्नत को चढ़ाएंगे।
जबकि मणिराम के भाई मोती राम ने कहा कि सुखदेव ऋषि को पारंपरिक धाम अर्पित करेंगे। सुरंग से बाहर निकालने के बाद जब 108 एंबुलेंस से सतीश व मणिराम को क्षेत्रीय अस्पताल में लाया गया, तो उनके भाई भी साथ में थे। खुशी से आंसू झलक रहे थे। रुंधे गले से बोले भगवान की कृपा व लोगों की दुआएं काम आ गई। प्रशासन ने अच्छी व्यवस्था कर रखी थी।
भगवान पर था पूरा भरोसा, गांव से पहुंचे थे काफी लोग
सुरंग में 12 सितंबर की रात को फंसे मजदूर सतीश तोमर के भाई विनोद तोमर ने बताया कि जब उन्हें हादसे का पता चला, तो उनके पांव से जमीन खिसक गई थी। गांव से परिजनों सहित अन्य लोग पहुंच रहे थे। विनोद की आंखों से आंसू छलक आए। उन्होंने अपने दूसरे रिश्तेदार से बात करने को कहा। उन्होंने बताया कि उन्हें भगवान पर पूरा भरोसा था। विनोद के साथ चारा अनिल तोमर व जितेंद्र तोमर सहित अन्य भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि गांव से लोग यहां पहुंचे थे।
खुशी में खिलाएंगे पारंपरिक धाम- सुरंग में 12 सितंबर की रात को फंसे मजदूर मणिराम के बाहर निकलने के बाद बिलासपुर अस्पताल में पहुंचे उनके जीजा चिरंजी लाल व मोती लाल ने बताया कि सुखदेव ऋषि ने उनकी मन्नत पूरी कर दी। खुशी में पारंपरिक धाम खिलाई जाएगी। मणिराम के परिजनों ने बताया कि गांव से प्रतिदिन कई लोग टीहरा में पहुंचते थे। सोमवार को भी काफी संख्या में लोग यहां आए हुए थे।
कैसे हुआ टनल हादसा, प्रदेश सरकार करेगी जांच
हिमाचल सरकार बिलासपुर के टीहरा सुरंग हादसे की गंभीरता से जांच करेगी। आगे से ऐसे तमाम कार्यों का एडवांस में ही आपदा प्लान मांगेगी। राज्य सरकार ने टीहरा सुरंग हादसे से कड़ा सबक लिया है। राज्य सरकार और जिला प्रशासन बिलासपुर के अधिकारियों ने सुरंग में फंसे दो मजदूरों को निकालने के बाद अब राहत की सांस ली है। पिछले दस दिन से सरकार और स्थानीय प्रशासन इसी प्रयास में रहे कि पहले श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास किए जाएं।
दो श्रमिकों को जीवित बाहर निकालने में कामयाबी मिली। अब सरकार इस हादसे की जांच पर फोकस करेगी। प्रदेश सरकार में आपदा प्रबंधन देख रहे अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व तरुण श्रीधर ने सोमवार को पहले तो इस कामयाबी के लिए जिला और स्थानीय प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अब इस हादसे की गंभीरता से छानबीन की जाएगी कि यह कैसे हुआ। तमाम तरह के निर्माण कार्यों के लिए सभी विभागों को पहले आपदा प्रबंधन प्लान देने को कहा गया है। इससे भविष्य में आपदा प्रबंधन की दिशा में शुरू से ही बचाव कार्य किए जाएंगे।
ये हैं हिमाचल की प्रस्तावित सुरंगें
लारजी सुरंग बन चुकी है। रोहतांग टनल का काम लगभग आधा हो चुका है। 13 अन्य सुरंगों का निर्माण आगे प्रस्तावित है। इनमें चामुंडा से होली, तीसा-किलाड़ से चन्नी दर्रा और जलोड़ी जोत सुरंगों की प्री-फिजिबिलिटी स्टडी हो रही है।
अन्य प्रस्तावित सुरंगों में हिमफेड पेट्रोल पंप शिमला से आईजीएमसी, लिफ्ट से हिमफेड पेट्रोल पंप शिमला, रानीताल, लिफ्ट से लक्कड़बाजार, संजौली से ढली, स्वारघाट-बिलासपुर बाईपास सड़क पर कैंची मोड़ से मेला, खड़ापत्थर, बंगाणा से धनेटा, कुल्लू में कारसेहर से तेलांग और होली से उतराला शामिल हैं।