हजारों शिक्षकों को मिली बड़ी राहत, वेतन कटौती पर लगी रोक
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पोस्ट ग्रेजुएट टीचर की पे फिक्सेशन होने के बाद हुई वेतन कटौती के आदेशों को हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में चुनौती देने वाले शिक्षक को बड़ी राहत मिल गई है। ट्रिब्यूनल ने उच्च शिक्षा निदेशक के आदेशों को चुनौती देने वाले शिक्षक की वेतन कटौती पर स्टे लगा दिया है।
ट्रिब्यूनल के यह आदेश सिर्फ ऐसे शिक्षकों पर ही लागू होंगे, जो ट्रिब्यूनल में गए थे। अन्य शिक्षकों पर वेतन कटौती के आदेश लागू रहेंगे। वेतन कटौती से बचने के लिए अन्य शिक्षकों को भी ट्रिब्यूनल जाना पड़ेगा।
पीजीटी पंकज चौहान बनाम स्टेट केस में ट्रिब्यूनल ने स्टे लगाया है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने न्यूनतम पे बैंड लागू करने को हिमाचल के सिविल सर्विस नियमों का हवाला देते हुए वेतन कटौती के आदेश जारी किए हैं।
शिक्षकों को हो रहा था इतना नुकसान
न्यूनतम पे बैंड लागू होने से 543 पीजीटी का करीब 2 हजार रुपये तक वेतन घट गया है। शिक्षकों को नवंबर से वेतन घट कर ही मिलेगा। वित्त महकमे की अधिसूचना को शिक्षा विभाग ने गलत तरीके से लागू कर दिया था।
इस गलती को चार साल बाद निदेशालय ने सुधारते हुए पीजीटी का वेतन घटाया है। निदेशालय ने सभी डीडीओ को आदेश जारी कर इन शिक्षकों की सर्विस बुक में संशोधन करने को भी कहा है। वेतन कटौती के आदेश 10 अक्तूबर को जारी हुए थे। एक अक्तूबर 2012 के बाद नियमित होने वाले 543 पीजीटी का वेतन घटाया गया है।
अनुबंध आधार और पैरा टीचर पॉलिसी 2003 के तहत अक्तूबर 2012 के बाद प्रवक्ताओं को पे स्ट्रक्चर 10300-34800 जमा 4200 रुपये ग्रेड पे पर नियुक्त किया गया था। इन्हें इनिशियल स्टार्ट 16290 रुपये दिया था। अब उच्च निदेशालय ने स्टेट सिविल सर्विस नियम 2012 के नियम 5(2) का हवाला देते हुए पीजीटी को न्यूनतम पे बैंड 10300 जमा 4200 रुपये ग्रेड पे पर फिक्स किया है।
अब पीजीटी को 14500 रुपये पर फिक्स किया गया है। उच्च शिक्षा निदेशक के इन आदेशों को कुछ शिक्षकों ने प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी। इसके अलावा टीजीटी मामले में भी उन शिक्षकों को राहत मिली है, जो ट्रिब्यूनल में गए थे।