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ऊर्जा उत्पादकों को बड़ी राहत, प्रोजेक्ट रिपोर्ट में नहीं जुड़ेगा लाडा फंड

Sat, 09 Nov 2019 05:00 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 09 Nov 2019 05:00 AM IST
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Big relief to energy producers, Lada fund will not be added in project report
सांकेतिक तस्वीर

हिमाचल में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार निवेशकों पर खासी मेहरबान है। प्रदेश सरकार ने ऊर्जा उत्पादकों को बड़ी राहत देते हुए लोकल एरिया डेवलेपमेंट अथॉरिटी (लाडा) फंड को प्रोजेक्ट रिपोर्ट में नहीं जोड़ने का फैसला लिया है।

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इन्वेस्टर मीट के दूसरे दिन ऊर्जा क्षेत्र के निवेशकों से चर्चा करते हुए यह घोषणा की गई। लाडा फंड का इंतजाम अब कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से किया जाएगा। पब्लिक सेक्टर के लिए यह व्यवस्था शुरू हो गई है।
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प्राइवेट सेक्टर के लिए राज्य कैबिनेट में प्रस्ताव भेजा जाएगा। ऊर्जा उत्पादकों को लाडा फंड के तहत प्रोजेक्ट की लागत का 1.5 फीसदी देना होता है। इस फंड का उल्लेख प्रोजेक्ट रिपोर्ट में किया जाता है। इस व्यवस्था के चलते प्रोजेक्ट की लागत बढ़ जाती है। टैरिफ भी बढ़ जाता है।
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इस समस्या को देखते हुए सरकार ने लाडा फंड देने के लिए अलग व्यवस्था कर दी है।  बड़े ऊर्जा उत्पादकों को अभी इसका लाभ मिलेगा। छोटे उत्पादकों के लिए भी सरकार इसकी व्यवस्था करने जा रही है।

प्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत देते हुए प्रोजेक्ट लगाने को 40 हेक्टेयर तक की वन स्वीकृतियां क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से ही मंजूर करने का फैसला लिया है। डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट सिद्धांता दास ने यह जानकारी दी।

अब वन स्वीकृतियों की फाइलें दिल्ली नहीं भेजी जाएंगी

इस व्यवस्था के होने से अब वन स्वीकृतियों की फाइलें दिल्ली नहीं भेजी जाएंगी। जल्द ही मंजूरियां मिल जाएंगी। चर्चा सत्र के दौरान ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि हाइड्रो पावर को रिनुएबल एनर्जी घोषित करने से अब ऊर्जा उत्पादकों को बैंकों से 12 की जगह 20 सालों के लिए ऋण मिल सकेगा।

ऊर्जा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव ट्रांसमिशन एसकेजी रहाते ने बताया कि प्रदेश के दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में उत्पादित होने वाली बिजली को बाहर लाने के लिए हरसंभव मदद दी जाएगी। सोलर एनर्जी कारपोरेशन के एमडी जतिंद्र नाथ ने बताया कि काजा में दो मेगावाट के सोलर प्लांट का काम शुरू हो गया है। अभी सोलर पावर महंगी पड़ रही है। आने वाले कुछ वर्षों में बैटरी की कीमत घटेगी। ऐसे में यह पावर भी सस्ती हो जाएगी।

ऊर्जा सेक्टर ने जुटाया सबसे ज्यादा 35 हजार करोड़ का निवेश

ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के लिए ऊर्जा सेक्टर में सबसे अधिक निवेश होने जा रहा है। 92 हजार करोड़ के एमओयू में से 35 हजार करोड़ का निवेश ऊर्जा क्षेत्र में होगा। बीते कई सालों से लंबित बिजली परियोजनाओं को जयराम सरकार ने गति दी है। निवेशकों को राहत देने के लिए ऊर्जा नीति में भी बदलाव किया गया है। चर्चा सत्र के दौरान एसजेवीएन और एनटीपीसी ने प्रदेश में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की वचनबद्धता को दोहराया।

एसजेवीएन के अध्यक्ष नंदलाल शर्मा ने कहा कि हिमाचल को देश की पावर कैपिटल बनाना है। इसके लिए काम शुरू कर दिया गया है। सरकार के साथ किए गए 23 हजार करोड़ के एमओयू पर काम शुरू कर दिया गया है। एनटीपीसी के प्रदीप सिंह ने कहा कि सैली और याड परियोजना के लिए सरकार के साथ एमओयू किया गया है। उन्होंने सरकार से अन्य प्रोजेक्टों पर भी काम करने की इच्छा जताई।

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