हिमाचल प्रदेश: 15 हजार अस्थायी शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट सेे बड़ी राहत, नियुक्तियों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं रद्द
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नियुक्त करीब पंद्रह हजार अस्थायी शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर दो ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से फैसला सुनाते हुए इन शिक्षकों की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए पैट, पैरा, पीटीए और ग्रामीण विद्या उपासकों के नियमितीकरण की राह आसान कर दी।
शुक्रवार सुबह 11.05 बजे आए इस फैसले के बाद से शिक्षकों में उत्साह है। साल 2010 से विभिन्न न्यायालयों में यह मामला विचाराधीन होने से शिक्षकों का भविष्य अधर में था। अब फैसला हक में आने से इनके नियमित होने की आस जग गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिसंबर, 2014 को अस्थायी शिक्षकों के हक में दिए हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
फैसला आने के बाद राज्य सरकार ने 10 साल का सेवाकाल पूरा कर चुके पैरा शिक्षकों को नियमित किया था। सात साल का कार्यकाल पूरा कर चुके पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया था। 22 जनवरी, 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर यथास्थिति बरकरार रखने के आदेश दिए थे।
साल 2002 में शुरू हुई थी अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां
हिमाचल में अस्थायी शिक्षकों की भर्तियां पिछले 17 वर्षों में हुई हैं। इनमें ग्रामीण विद्या उपासकों की नियुक्ति 2002 में हुई। इनकी संख्या करीब 1400 है। साल 2003 से लेकर 2007 तक 3409 प्राथमिक सहायक अध्यापकों की नियुक्तियां प्रारंभिक शिक्षा विभाग में हुई। 2004 में 2200 पैरा शिक्षकों की भर्तियां हुईं। 2006 से 7500 पीटीए शिक्षकों की भर्ती हुई है।
प्रदेश के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने सुप्रीम कोर्ट से अस्थायी शिक्षकों के मामले में आए फैसले को सरकार और शिक्षकों के हित में बताया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के दिशा निर्देशानुसार सरकार ने पूरी मजबूती से अपना पक्ष कोर्ट में रखा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने बीते साल से ही नियमित शिक्षकों के बराबर इन्हें वेतन देना शुरू कर दिया था। मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के चलते इन्हें नियमित नहीं किया सका। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की पूरी जानकारी मिलते ही सरकार नियमितीकरण पर विचार करेगी।