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Shimla News: पीनी की लीकेज और टनल निर्माण से धंसी भट्ठाकुफर सड़क
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खास खबर
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम ने डीसी को सौंपी जांच रिपोर्ट, फोरलेन के निर्माण कार्य पर अभी जारी रहेगी रोक,
टनल निर्माण पर ब्लास्टिंग पर भी लगेगी रोक
22 नंवबर को भट्टाकुफर में अचानक धंसी थी सड़क
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के भट्ठाकुफर में सड़क धंसने के मामले में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम ने मंगलवार को अपनी जांच रिपोर्ट उपायुक्त अनुपम कश्यप को सौंप दी। रिपोर्ट के अनुसार पेयजल लाइनों में लीकेज और टनल निर्माण के कारण भट्ठाकुफर में सड़क धंसी थी।
रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि इस क्षेत्र में फोरलेन निर्माण के लिए हो रही ब्लास्टिंग पर रोक लगाना जरूरी है। जिला प्रशासन यह रिपोर्ट अब सरकार को भेजने जा रहा है। हालांकि अभी इस क्षेत्र में फोरलेन निर्माण पर लगाई गई रोक जारी रहेगी। 22 नवंबर को भट्ठाकुफर में अचानक एनएच को जोड़ने वाली काॅलोनी की सड़क पर 2.2 मीटर लंबा, 1.5 मीटर चौड़ा और चार मीटर गहरा गड्ढा हो गया था। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम ने बाद में इस क्षेत्र का सर्वेक्षण किया था। इस सर्वेक्षण में टीम ने पाया कि जिस जगह पर सड़क धंसी है, वहां दो पानी की पाइपों में लीकेज हो रही है। इस लीकेज को सड़क धंसने का मुख्य कारण माना गया है। हालांकि इस क्षेत्र में रिहायशी भवनों में जो दरारें आ रही हैं, उसके पीछे अन्य कारणों से भी इंकार नहीं किया है।
रिपोर्ट के अनुसार मानव जनित कारण जिसमें टनल निर्माण की वाइब्रेशन और अन्य कारण जिम्मेदार हैं। टनल निर्माण के लिए ब्लास्टिंग को पूर्ण रूप से बंद करने का सुझाव भी रिपोर्ट में दिया है। टनल के मैनुअल तरीके से निर्माण करने पर कोई रोक नहीं है।
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उपायुक्त ने कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें घटना के लिए पानी की लीकेज को प्रमुख कारण बताया है। जल शक्ति विभाग ने मौके पर लीकेज दूर कर दी है। जल शक्ति विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है कि टनल निर्माण प्रभावित क्षेत्र में भूमि के नीचे कहां-कहां पाइप बिछे हैं। बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल ज्योति राणा, जिला राजस्व अधिकारी सुमेध शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
डीसी ने कंपनी से तलब किया रिकार्ड
डीसी अनुपम कश्यप ने टनल निर्माण कर रही कंपनी के प्रतिनिधियों से इस पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी है। इसमें मार्च 2024 में जब टनल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, तो उस समय सर्वेक्षण करवाया था। इसका सारा रिकार्ड मांगा है। निर्माण कार्य के दौरान प्रशासन के साथ क्या-क्या पत्राचार किया गया, सुझावों के क्रियान्वयन को लेकर क्या कदम कब-कब उठाए गए इसकी जानकारी भी देने के निर्देश दिए हैं।
घरों को हुए नुकसान का मिलेगा मुआवजा
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता आम व्यक्ति की जान की सुरक्षा और उसकी संपत्ति को सुरक्षित रखना है। फोरलेन के निर्माण कार्य के दौरान टनल के दायरे में आने वाले क्षेत्र में बने लोगों के घरों में दरारें आ चुकी हैं। जिला प्रशासन की टीम ने इसके बारे में स्वयं निरीक्षण किया है। निर्माण कार्य कर रही कंपनी से ऐसे घरों के नुकसान की रिपोर्ट तैयार करवाई जाएगी, उन्हें मुआवजा दिलवाने के लिए प्रशासन हर संभव सहायता करेगा।
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भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम ने डीसी को सौंपी जांच रिपोर्ट, फोरलेन के निर्माण कार्य पर अभी जारी रहेगी रोक,
टनल निर्माण पर ब्लास्टिंग पर भी लगेगी रोक
22 नंवबर को भट्टाकुफर में अचानक धंसी थी सड़क
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के भट्ठाकुफर में सड़क धंसने के मामले में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम ने मंगलवार को अपनी जांच रिपोर्ट उपायुक्त अनुपम कश्यप को सौंप दी। रिपोर्ट के अनुसार पेयजल लाइनों में लीकेज और टनल निर्माण के कारण भट्ठाकुफर में सड़क धंसी थी।
रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि इस क्षेत्र में फोरलेन निर्माण के लिए हो रही ब्लास्टिंग पर रोक लगाना जरूरी है। जिला प्रशासन यह रिपोर्ट अब सरकार को भेजने जा रहा है। हालांकि अभी इस क्षेत्र में फोरलेन निर्माण पर लगाई गई रोक जारी रहेगी। 22 नवंबर को भट्ठाकुफर में अचानक एनएच को जोड़ने वाली काॅलोनी की सड़क पर 2.2 मीटर लंबा, 1.5 मीटर चौड़ा और चार मीटर गहरा गड्ढा हो गया था। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की टीम ने बाद में इस क्षेत्र का सर्वेक्षण किया था। इस सर्वेक्षण में टीम ने पाया कि जिस जगह पर सड़क धंसी है, वहां दो पानी की पाइपों में लीकेज हो रही है। इस लीकेज को सड़क धंसने का मुख्य कारण माना गया है। हालांकि इस क्षेत्र में रिहायशी भवनों में जो दरारें आ रही हैं, उसके पीछे अन्य कारणों से भी इंकार नहीं किया है।
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रिपोर्ट के अनुसार मानव जनित कारण जिसमें टनल निर्माण की वाइब्रेशन और अन्य कारण जिम्मेदार हैं। टनल निर्माण के लिए ब्लास्टिंग को पूर्ण रूप से बंद करने का सुझाव भी रिपोर्ट में दिया है। टनल के मैनुअल तरीके से निर्माण करने पर कोई रोक नहीं है।
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उपायुक्त ने कहा कि भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसमें घटना के लिए पानी की लीकेज को प्रमुख कारण बताया है। जल शक्ति विभाग ने मौके पर लीकेज दूर कर दी है। जल शक्ति विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है कि टनल निर्माण प्रभावित क्षेत्र में भूमि के नीचे कहां-कहां पाइप बिछे हैं। बैठक में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी प्रोटोकॉल ज्योति राणा, जिला राजस्व अधिकारी सुमेध शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
डीसी ने कंपनी से तलब किया रिकार्ड
डीसी अनुपम कश्यप ने टनल निर्माण कर रही कंपनी के प्रतिनिधियों से इस पूरे मामले में रिपोर्ट मांगी है। इसमें मार्च 2024 में जब टनल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, तो उस समय सर्वेक्षण करवाया था। इसका सारा रिकार्ड मांगा है। निर्माण कार्य के दौरान प्रशासन के साथ क्या-क्या पत्राचार किया गया, सुझावों के क्रियान्वयन को लेकर क्या कदम कब-कब उठाए गए इसकी जानकारी भी देने के निर्देश दिए हैं।
घरों को हुए नुकसान का मिलेगा मुआवजा
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता आम व्यक्ति की जान की सुरक्षा और उसकी संपत्ति को सुरक्षित रखना है। फोरलेन के निर्माण कार्य के दौरान टनल के दायरे में आने वाले क्षेत्र में बने लोगों के घरों में दरारें आ चुकी हैं। जिला प्रशासन की टीम ने इसके बारे में स्वयं निरीक्षण किया है। निर्माण कार्य कर रही कंपनी से ऐसे घरों के नुकसान की रिपोर्ट तैयार करवाई जाएगी, उन्हें मुआवजा दिलवाने के लिए प्रशासन हर संभव सहायता करेगा।