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हिमाचल में बिक रहे प्रतिबंधित रसायन, सेब के फूलों पर किया जाता है छिड़काव

Fri, 02 Apr 2021 03:20 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 02 Apr 2021 03:20 AM IST
सार

  • एक ड्रम की स्प्रे चार हजार रुपये तक
  •  सेब के फूलों पर फसल टिकाने का किया जा रहा दावा
  • केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड ने नहीं दी है सेब पर छिड़काव की अनुमति

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Banned chemicals being sold in Himachal, sprayed on apple flowers
हिमाचल में बिक रहे प्रतिबंधित रसायन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में प्रतिबंधित रसायन बिक रहे हैं। यहां पर प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर (पीजीआर) के एक ड्रम की स्प्रे चार हजार रुपये तक बेची जा रही है। इससे सेब के फूलों पर फसल टिकाने का दावा किया जा रहा है, जबकि केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड ने इस तरह के छिड़काव की अनुमति नहीं दी है। इन रसायनों में जिब्रेलिक एसिड होता है। इनका छिड़काव फूलों पर किया जाता है। 

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प्रदेश में इन दिनों सेब बागीचों में फूल आ रहे हैं। इन फूलों से फलों की सेटिंग प्रक्रिया चल रही है। सेटिंग के लिए जिब्रेलिक एसिड सहायक होता है।

यूं तो यह सेब के पेड़ों में पहले से मौजूद होता है, पर इसे बाहर से छिड़काव कर दिया जाता है। इस जिब्रेलिक एसिड को बाजार में कई रूपों में पाया जाता है। प्रोमेलिन और परलान दो ऐसे जिब्रेलिक एसिड हैं, जिनमें जीए 7 और 4 होते हैं। इनकी ही सबसे ज्यादा मांग है। विशेष यह है कि इस रसायन का कभी भी हिमाचल प्रदेश में सेब की फसल पर वैज्ञानिक परीक्षण नहीं किया गया है, जिससे इनका छिड़काव पारिस्थितिकी के लिए अनुकूल ठहराया जा सके। ऐसे तमाम रसायन जिन्हें केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड से संबंधित फ सल पर छिड़काव की अनुमति नहीं मिली होती है, उन्हें प्रतिबंधित माना जाता है। ऐसे मामलों पर कार्रवाई राज्य का बागवानी विभाग कर सकता है, पर अधिकारी इस बारे में चुप बैठे हुए हैं। 
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इन रसायनों की संस्तुति नहीं, बाजार में चल रहा अवैध धंधा
डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के सह निदेशक  डॉ. पंकज गुप्ता ने कहा है कि इन रसायनों की संस्तुति नहीं की गई है। इनका बाजार में अवैध धंधा चला हुआ है। जीए 4 और 7 पर विश्वविद्यालय ने शोध जरूर किए हैं, मगर इनकी संस्तुति कभी नहीं की गई है। जब तक केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड मेें ऐसे रसायन पंजीकृत न हों तब तक इनके छिड़काव की अनुमति दी भी नहीं जा सकती है। ऐसे रसायनों की डोज और एप्लीकेशन गलत हो जाए तो ये फ्रूट सेट में मदद बेशक करें, मगर बाद में इनके गिरने की या अन्य तरह की समस्याएं भी आ सकती हैं। 
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