बरसात में जंगलों में छोटे पौधे रोपने पर रोक, वन विभाग ने लिया फैसला
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वन विभाग अब बरसात के मौसम में प्रदेश में छोटे पौधे नहीं लगाएगा। वन विभाग ने इसके लिए खाका तैयार कर लिया है। वन विभाग ने जो योजना तैयार की है, उसके अनुसार अब वन विभाग ढाई साल तक पौधों को नर्सरी में तैयार करेंगे।
जब पौधा ढाई साल के बाद करीब चार फीट का हो जाएगा, उसके बाद पौधे को बरसात के मौसम में जंगलों में लगाया जाएगा। वन विभाग का कहना है कि इससे पौधरोपण के दौरान जंगलों में लगाए जाने वाले पौधों की मृत्यु दर कम होगी, जिसका सीधा असर पर्यावरण पर भी पड़ेगा।
इसकी पुष्टि वन विभाग के अरण्यपाल आरएस पटियाल ने की है। पटियाल ने कहा कि इस कार्य के लिए हर रेंज के अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। वन विभाग का दावा है कि ढाई साल पौधे नर्सरी में तैयार होंगे।
ऐसे में वन विभाग द्वारा लगाए गए छोटे पौधे जहां झाड़ियों और घास में दबकर खत्म हो जाते थे वहीं लोगों द्वारा घास काटते वक्त भी इन छोटे पौधों को घास के साथ काट दिया जाता था। जो पौधे बचते थे, उनमें से कई जंगलों में आग की वजह से नष्ट हो जाते हैं।
12 से 14 जुलाई तक लगाए 15 लाख पौधे
प्रदेश में वन विभाग हर साल जंगलों में लाखों पौधे लगाता है। इनमें से करीब 50 फीसदी से अधिक पौधे विभिन्न कारणों से नष्ट हो जाते हैं। इस वर्ष राज्य सरकार ने विशेष अभियान के दौरान 12 से 14 जुलाई तक विभिन्न जिलों में तीन दिन में ही 15 लाख पौधे लगा दिए थे।
पौधरोपण के चार साल बाद होती है गणना
वन विभाग पौधरोपण के चार साल बाद पौधों की गणना करता है। अगर 60 फीसदी पौधे सही पाए जाते हैं तो पौधरोपण को सफल माना जाता है। लेकिन अधिकांश मामलों में यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता था, जिस कारण पौधरोपण के बाद करीब 50 फीसदी पौधे ही बच पाते थे। बड़े पौधे लगाने से 70 से 80 फीसदी पौधों के बचने की उम्मीद की जा रही है।