रामलोक मंदिर के अधिग्रहण पर लगी रोक, बाबा अमरदेव का रहेगा कब्जा
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हिमाचल के सोलन जिले के बहुचर्चित कंडाघाट के रूड़ा में करोड़ों रुपये से बने रामलोक मंदिर को सरकार के अधीन करने के फैसले पर रोक लग गई है। अब इस मंदिर पर आगामी आदेश तक संस्थापक बाबा अमरदेव का ही कब्जा रहेगा।
रामलोक मंदिर अधिग्रहण का मामला अब लंबे समय के लिए लटक गया है। नौ जनवरी 2019 को कंडाघाट एसडीएम के फैसले पर मंडलायुक्त शिमला की अदालत ने स्टे जारी कर दिया है। अब मंदिर पर आगामी कोई भी फैसला आने तक यथास्थिति रहेगी।
इससे पूर्व तहसीलदार और एसडीएम कंडाघाट ने मंदिर के सरकारी अधिग्रहण का फैसला सुनाया था। इस फैसले के खिलाफ बाबा अमरदेव ने मंडलायुक्त शिमला के पास स्टे के लिए याचिका दायर की।
इसे मंजूर करते हुए मंदिर अधिग्रहण के आदेश पर रोक लगा दी गई है। गौरतलब है कि मंदिर के सरकारी भूमि पर निर्मित होने को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने तहसीलदार कंडाघाट के पास अपील दाखिल की थी।
इसकी सुनवाई के बाद तहसीलदार ने मंदिर के सरकारी अधिग्रहण का फैसला सुनाया था। इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने आदेश के खिलाफ एसडीएम के पास अपील की, लेकिन एसडीएम ने तहसीलदार के फैसले को बरकरार रखा।
पांच बीघा छह बिस्वा जमीन पर पाया था अतिक्रमण
इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने मंडलायुक्त के पास स्टे के लिए याचिका दाखिल कर दी। इस पर मंगलवार को स्टे के आदेश पारित हो गए हैं। उधर, मंदिर प्रंबधन के अधिवक्ता सुधीर ठाकुर ने स्टे मिलने की पुष्टि की है।
तहसीलदार कंडाघाट ने अपने फैसले में कहा था कि मंदिर का निर्माण राजस्व विभाग की पांच बीघा 6 बिस्वा जमीन पर हुआ है। अतिक्रमण करने पर मंदिर प्रबंधन पर 1.06 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया था। उस समय तहसीलदार ओपी मेहता ने फैसला दिया था कि चूंकि राम मंदिर आस्था का केंद्र है।
ऐसे में मंदिर तोड़ना तर्कसंगत नहीं, इसलिए मंदिर को सरकार के अधीन लेकर इसका प्रबंधन जिला प्रशासन को दिया जाए। मंदिर निर्माण के बाद तुंदल पंचायत प्रधान ने 2017 में तहसीलदार कंडाघाट के पास केस दायर किया था।