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वीरभद्र के लिए फर्जीवाड़ा करने वाले की याचिका कोर्ट ने ठुकराई

Sun, 21 Aug 2016 08:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 21 Aug 2016 08:37 AM IST
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Bail plea of cm virbhadra singh lic agent anand chauhan rejected

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से जुड़े मनी लॉंड्रिंग मामले में आरोपी एलआईसी एजेंट आनंद सिंह चौहान की जमानत याचिका सीबीआई अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इस मामले में चौहान की संलिप्तता दिखाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने चौहान को चंडीगढ़ से आठ जुलाई को गिरफ्तार किया था।

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पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों से साफ है आनंद चौहान मनी लॉंड्रिंग के मामले में सक्रिय रूप से शामिल था। मनी लॉंड्रिंग प्रीवेंशन एक्ट (पीएमएलए) के कठोर प्रावधानों के मद्देनजर ऐसे हालात में आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। ईडी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि चौहान के खिलाफ काफी साक्ष्य हैं और अगर उसे जमानत मिलती है तो वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है।
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जिन लोगों के खिलाफ यह मामला दर्ज किया गया है वह ऊंचे पदों पर हैं। इसलिए उसे जमानत देने से केस की जांच प्रभावित होगी। जमानत याचिका पर बहस करते हुए चौहान के अधिवक्ता रीबैका जौन ने कहा कि यह पैसा चौहान का नहीं था और न हीं उसे कोई लाभ मिलने वाला था।

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ईडी के अधिवक्ता ने कहा, साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है आरोपी

Bail plea of cm virbhadra singh lic agent anand chauhan rejected

ईडी ने चौहान को आठ जुलाई को गिरफ्तार किया था जबकि अब तक कोई दूसरी गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है। ईडी के विशेष अधिवक्ता नवीन माटा ने संक्षिप्त बहस करते हुए कहा कि चौहान ने अपराध से कमाए हुए पैसे को निवेश करवाया। उसने इसके लिए दस्तावेज भी तैयार किए।

इसके अलावा दिल्ली के जीके-टू में चार करोड़ रुपये प्रॉपर्टी में निवेश करवाए। अभी तक चौहान के कई खातों का पता चला है और उनमें करोड़ों रुपये के लेनदेन का पता चला है। उसकी सहायक के खाते में भी 50 लाख के लेनदेन का खुलासा हुआ है। मामले में आरोपी चौहान ने 13 जुलाई को जमानत याचिका दायर की थी।

ईडी ने जमानत याचिका पर 19 जुलाई को अपना जवाब दाखिल किया था। ईडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि चौहान ने वीरभद्र सिंह की अघोषित आय को जीवन बीमा में लगवाया और उसके खातों में हेरफेर कर उसके पैसे को खातों में दिखाया।

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