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Himachal: 25 हजार रुपये क्विंटल बिक रहे बबूने के फूल, दिल्ली से सीधे किसानों के खेतों में पहुंच रहे आढ़ती
Fri, 19 May 2023 06:24 PM IST
अरविन्द ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिपुरधार (सिरमौर)
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिपुरधार (सिरमौर)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 19 May 2023 06:24 PM IST
सार
बबूने के फूलों में कई औषधीय गुण हैं। इसी वजह से इसे रामबाण दवा भी कहा जाता है। कम सिंचित होने वाली जगहों पर भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है।
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बबूने के फूलों का तुड़ान करते ग्रामीण।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
सिरमौर के फूलों की राष्ट्रीय राजधानी में मांग काफी बढ़ गई है। जिले के ट्रांसगिरि इलाके में उगाए जाने वाले बबूने का फूल (कैमोमाइल) 10,000 से 25,000 रुपये क्विंटल घर बैठे ही बिक रहा है। वहीं, किसानों के खेतों से माल सीधा दिल्ली के गाजीपुर पहुंच रहा है। आढ़ती माल लेने के लिए गाड़ियां दिल्ली से सीधे गांव में भेज रहे हैं।
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खास बात यह है कि दिल्ली पहुंचते ही माल साथ के साथ ही बिक रहा है और किसानों को राशि का भुगतान भी साथ के साथ ही ऑनलाइन किया जा रहा है। किसानों को अपने उत्पाद के अच्छे दाम मिल रहे हैं, जिससे किसान मालामाल हो रहे हैं इस फूल की खेती चुनवी, नौहराधार, चौरास, चाढ़ना, पनोग, घंडूरी, शमोगा, देनामानल और बोगधार आदि क्षेत्रों में उगाया जा रहा है।
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चुनवी गांव के गोपाल सूर्या ने बताया कि उन्होंने एक बीघा हिस्से में पहली बार बबूने की खेती की है। इसका एक तूड़ान कर चुके हैं। एक पौधा पांच से छह बार फूल दे रहा है। जनवरी में बीज की पनीरी लगाई थी। फरवरी माह में खेतों में रुपाई की। अप्रैल माह में फूल देने शुरू किए। ये सीजन अगस्त तक चलेगा, जिसके उन्हें लहसुन और अदरक से भी काफी बेहतर दाम मिल रहे हैं।
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कई औषधीय गुणों से भरपूर है फूल
बबूने के फूलों में कई औषधीय गुण हैं। इसी वजह से इसे रामबाण दवा भी कहा जाता है। कम सिंचित होने वाली जगहों पर भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है। इसे उत्तरप्रदेश के हमीरपुर और बुंदेलखंड जिलों की बंजर भूमि में भी बड़े स्तर पर उगाया जा रहा है। बबूने के फूलों में दिमाग को शांति पहुंचने वाली लाजवाब खुशबू होती है।
फूलों की खेती के प्रति बढ़ रहा रुझान
उद्यान विभाग सिरमौर के उपनिदेशक डॉ. सतीश शर्मा ने बताया कि जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में फूलों की खेती के प्रति किसानों का रुझान काफी बढ़ रहा है। 25 फीसदी किसान पोली हाउस से ही फूलों की खेती कर रहे हैं, जबकि 50 फीसदी किसान खुले खेतों में खेती कर रहे हैं। किसानों को इन फूलों के दाम भी अच्छे मिल रहे हैं। मैदानी इलाकों के मुकाबले पहाड़ों में फूलों की अच्छी पैदावार हो रही है।