फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   azadi ka amrut mahotsav: Indian Institute of Advance Studies Shimla where draft for freedom of India prepared

एडवांस्ड स्टडीज: ऐतिहासिक इमारत में बना था स्वतंत्र भारत का खाका

Sat, 28 Aug 2021 04:02 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 28 Aug 2021 04:02 PM IST
सार

वायसरीगल लॉज  के आलीशान भवन का निर्माण 1880 में शुरू हुआ। इसे वास्तुकार हेनरी इरविन ने डिजाइन किया था। वायसरॉय लार्ड डफरिन के शासनकाल में एलिजाबेथन शैली में इसका निर्माण किया गया।

विज्ञापन
azadi ka amrut mahotsav: Indian Institute of Advance Studies Shimla where draft for freedom of India prepared
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी - फोटो : IIAS Shimla

विस्तार

अंग्रेजों के राज में उनकी ग्रीष्मकालीन राजधानी रहे शिमला में ही स्वतंत्र भारत का खाका तैयार किया गया था। इसे शिमला स्थित ऐतिहासिक भवन भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस) में बनाया गया था। उस समय इसे वायसरीगल लॉज कहते थे। यह ब्रिटिशकालीन भारत के शासक वायसरॉय का निवास स्थान था और अंग्रेज साल के लगभग आठ महीने यहीं से भारत की हुकूमत चलाते थे। भारत-पाक विभाजन की रूपरेखा भी इसी ऐतिहासिक इमारत में तैयार की गई थी।  

विज्ञापन


25 जून 1945 में ब्रिटिश सरकार के तत्कालीन गवर्नर जनरल और वायसरॉय आर्चिबाल्ड वैवेल की अध्यक्षता में शिमला सम्मेलन करवाया गया। इसमें राष्ट्रवादी नेताओं और भारत के कुछ अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं को संवैधानिक व्यवस्था के बारे में चर्चा के लिए बुलाया गया था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने इस सम्मेलन में भाग नहीं लिया था। हालांकि यह बातचीत सफल नहीं हो सकी। इसके बाद जुलाई 1945 में ब्रिटेन में नई सरकार बनने पर लेबर पार्टी के क्लेमंट एटली प्रधानमंत्री बने, तो उनकी सरकार ने भारत की स्वतंत्रता के प्रश्न पर आगामी बातचीत के लिए तीन वरिष्ठ कैबिनेट सदस्यों को शिमला भेजा, जिसे कैबिनेट मिशन कहा जाता है।
विज्ञापन


भारतीय नेताओं के साथ इसी भवन में हुई वार्ताओं के बाद 15 अगस्त 1947 को अस्तित्व में आए भारतीय राज्य की रूपरेखा तय करने में इस भवन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसी भवन से पूरे देश की सरकार चलती थी। ब्रिटिश हुकूमत के यहां बैठने वाले वॉयसरॉय की कुर्सी के साथ ही उस समय की हर चीज को संरक्षित किया गया है। सम्मेलन में पहुंचे नेताओं में पंडित जवाहर लाल नेहरू, खान अब्दुल गफ्फार खान, बल्लभ भाई पटेल, अब्बुल कलाम आजाद, राजगोपालाचारी, मुहम्मद अली जिन्ना के चित्र सहेज कर रखे गए हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


वायसरॉय और पंडित नेहरू ने की थी ड्राफ्ट पर चर्चा  
भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडी) में अंतिम वायसरॉय लार्ड माउंटबेटन और पंडित जवाहर लाल नेहरू के बीच भारत पाक विभाजन के ड्राफ्ट पर चर्चा हुई थी। इस बैठक में प्रयोग किया गया टेबल भवन में सुरक्षित रखा गया है, जो दो देशों के विभाजन की चर्चा का गवाह बना। 

मार्च से अक्तूबर तक इसी भवन से चलती थी ब्रिटिश सरकार 
1888 से लेकर 1947 तक इसी ऐतिहासिक भवन से साल में आठ माह तक ब्रिटिश सरकार चलती थी। वायसरॉय इसी भवन से फैसले लेते थे। इसलिए यह भवन अपने आप में भारत के स्वतंत्रता पूर्व और बाद के इतिहास का गवाह है। 

मुस्लिम लीग के अड़ियल रवैये से स्वतंत्र भारत के प्रस्ताव पर नहीं बनी सहमति 
शिमला की इस ऐतिहासिक इमारत में 12 मई 1946 को एक स्वतंत्र भारत बनाने के प्रस्ताव को मुस्लिम लीग के नेताओं ने नकार दिया। जिसके चलते कैबिनेट की इस बैठक में दो अलग स्वतंत्र राष्ट्र निर्माण की राह अपनानी पड़ी। 


1880 से जुलाई 1888 तक हुआ वायसरीगल लॉज का निर्माण 
वायसरीगल लॉज  के आलीशान भवन का निर्माण 1880 में शुरू हुआ। इसे वास्तुकार हेनरी इरविन ने डिजाइन किया था। वायसरॉय लार्ड डफरिन के शासनकाल में एलिजाबेथन शैली में इसका निर्माण किया गया। आजादी के बाद इसे राष्ट्रपति निवास नाम दिया गया। राष्ट्रपति के ग्रीष्मकालीन आवास को दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इंडिया इंस्टीट्यूट आफ एडवांस्ड स्टडी को 1964 में दान किया। 

भारत-चीन सीमा की मैकमोहन लाइन का यही तैयार हुआ था खाका 
इसी ऐतिहासिक भवन में भारत-चीन के बीच सीमा तय करने वाली मैकमोहन लाइन का खाका भी तैयार किया गया था। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed