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आजादी के अमृत महोत्सव: तिरंगे की रोशनी से जगमगाया नूरपुर किला
Fri, 22 Oct 2021 10:29 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, जसूर (कांगड़ा)
संवाद न्यूज एजेंसी, जसूर (कांगड़ा)
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 22 Oct 2021 10:29 PM IST
सार
नूरपुर किले की बनावट अद्भुत है। क्षतिग्रस्त होने के बावजूद किले की कला शैली और इतिहास रोचक है। इस किले का निर्माण राजा बासु के समय में 1580 से 1613 के मध्य हुआ था। वर्तमान में इसका रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण करता है।
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तिरंगे की रोशनी से जगमगाया नूरपुर किला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आजादी के अमृत महोत्सव और देश में 100 करोड़ कोरोना टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल करने के के उपलक्ष्य में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर किले में गुरुवार रात दीवारों पर लाइटों की रोशनी से बने तिरंगा आकर्षण का केंद्र रहा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के शिमला मंडल के तत्वावधान में यह कार्यक्रम करवाया गया। नूरपुर किले की बनावट अद्भुत है। क्षतिग्रस्त होने के बावजूद किले की कला शैली और इतिहास रोचक है।
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इस किले का निर्माण राजा बासु के समय में 1580 से 1613 के मध्य हुआ था। वर्तमान में इसका रखरखाव भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण करता है। 1849 में यह किला अंग्रेजों के अधीन आ गया था, तब उन्होंने किले के ज्यादातर हिस्से को तहस-नहस कर दिया था और बाकी का हिस्सा साल 1905 में भूकंप के दौरान बरबाद हो गया। नूरपुर के इस किले में जहांगीर भी अपनी पत्नी नूरजहां के साथ रुका था। इसके बाद ही इस स्थान का नाम नूरपुर पड़ा था।
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किले के मंदिर में कृष्ण के साथ होती है मीरा की पूजा
भगवान श्रीकृष्ण के साथ हमेशा देवी राधा का नाम लिया जाता है और देश के अधिकतर मंदिरों में दोनों की मूर्ति ही एक साथ नजर आती हैं। इस किले में मौजूद एक प्राचीन मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और मीरा की मूर्तियां एक साथ मौजूद हैं। भगवान कृष्ण और मीरा की पूजा एक साथ होती है।
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