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Ayodhya Verdict: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हिमाचल में दिखा सांप्रदायिक सौहार्द, कुल्लू में जलाए दीये

Sat, 09 Nov 2019 02:33 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/कुल्लू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/कुल्लू Published by: Krishan Singh Updated Sat, 09 Nov 2019 02:33 PM IST
सार

  • अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया
  • पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने रामलला के हक में निर्णय सुनाया
  • राम मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में एक ट्रस्ट बनाने के निर्देश दिए
  • नई मस्जिद बनाने के लिए अलग से पांच एकड़ जमीन देने के भी निर्देश
  • हिमाचल में पुलिस ने जगह-जगह किया फ्लैग मार्च
  • कुल्लू के रघुनाथ मंदिर में जलाए दीये

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Ayodhya Case Verdict 2019 : situation in himachal on Ayodhya verdict
- फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हिमाचल के लोगों में सांप्रदायिक सौहार्द दिखा। जहां बेहद शांत तरीके से कोर्ट के फैसले का स्वागत किया गया। कुल्लू के रघुनाथ मंदिर परिसर में दीये जलाए गए और भक्तों ने भजन-कीर्तन किया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी खुलकर फैसले का स्वागत किया। प्रदेश में कहीं भी किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई। हालांकि, पुलिस चौकस रही। कुल्लू और बंजार में फ्लैग मार्च भी किया गया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने सौहार्द बनाए रखा। 

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प्रदेश मुस्लिम वेलफेयर कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एजी शेख ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों में से किसी की भी हार नहीं हुई है। दोनों ही पक्षों को फैसले का सम्मान करना चाहिए। हर धर्म यह सीख देता है कि हमें एक-दूसरे के धर्म का मान और सम्मान करना चाहिए। वहीं, जामा मस्जिद धर्मशाला के शाही इमाम मोहम्मद कामिल जामिई और भाजपा मुस्लिम सैल बिलासपुर के अध्यक्ष मुनीर अख्तर लाली ने भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। 
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यहां जानिए फैसले की बड़ी बातें

Ayodhya Case Verdict 2019 : situation in himachal on Ayodhya verdict

अयोध्या विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने 40 दिनों की सुनवाई के बाद यह फैसला दिया। पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला के हक में निर्णय सुनाया। शीर्ष अदालत ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को राम मंदिर बनाने के लिए तीन महीने में ट्रस्ट बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि 02.77 एकड़ जमीन केंद्र सरकार के अधीन ही रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले जस्टिस कलिफुल्ला, श्रीराम पांचू और श्रीश्री रविशंकर की प्रशंसा की। साथ ही निर्मोही अखाड़े को मंदिर के लिए बनाए जाने वाले ट्रस्ट में जगह दी जाए, हालांकि यह केंद्र सरकार पर निर्भर करेगा। बाबरी मस्जिद विध्वंस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मस्जिद को गिराना कानून का उल्लंघन है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि तीन महीने के भीतर मंदिर बनाने के लिए ट्रस्ट बनाया जाए और मुस्लिम पक्ष को अलग से पांच एकड़ जमीन दी जाए। इस जमीन पर नई मस्जिद बनाई जाएगी।

कोर्ट ने ये भी कहा

Ayodhya Case Verdict 2019 : situation in himachal on Ayodhya verdict
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

अदालत ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड अयोध्या विवाद में अपना दावा रखने में विफल हुआ है। मुस्लिम पक्ष ऐसे सबूत पेश करने में विफल रहा है कि जिससे यह साबित हो सके कि विवादित जमीन पर सिर्फ उसका ही अधिकार है। कोर्ट ने फैसले में कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अलग जमीन दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि मुस्लिमों को नई मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक जमीन दी जाए। यह स्पष्ट है कि मुस्लिम अंदर नमाज पढ़ा करते थे और हिंदू बाहरी परिसर में पूजा किया करते थे। हालांकि हिंदुओं ने गर्भगृह पर भी अपना दावा कर दिया।

जबकि मुस्लिमों ने मस्जिद को छोड़ा नहीं था।अदालत ने यह भी कहा कि रामजन्मभूमि कोई व्यक्ति नहीं है, जो कानून के दायरे में आता हो। अदालत ने कहा कि आस्था के आधार पर फैसले नहीं लिए जा सकते हैं। ये विवाद सुलझाने के लिए सांकेतक जरूर हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में राम चबूतरा और सीता रसोई में पूजा हुआ करती थी। इस बात के सबूत हैं कि हिंदुओं के पास विवादित जमीन के बाहरी हिस्से का कब्जा था।

निर्मोही अखाड़ा न तो सेवादार है और न ही भगवान रामलला के श्रद्धालु

Ayodhya Case Verdict 2019 : situation in himachal on Ayodhya verdict

 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्मोही अखाड़ा न तो सेवादार है और न ही भगवान रामलला के श्रद्धालु है। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 'लिमिटेशन' की वजह से अखाड़े का दावा खारिज हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी। एएसआई के मुताबिक मंदिर के ढांचे के ऊपर ही मस्जिद बनाई गई थी। अदालत ने कहा कि हिंदू इसे भगवान राम की जन्मभूमि मानते हैं।

उनकी अपनी धार्मिक भावनाएं हैं। मुस्लिम इसे मस्जिद कहते हैं। हिंदुओं का मानना है कि भगवान राम केंद्रीय गुंबद के नीचे जन्मे थे। यह व्यक्तिगत आस्था की बात है।

लोगों की आस्था को स्वीकार करना होगा

चीफ जस्टिस ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि अदालत को लोगों की आस्था को स्वीकार करना होगा। अदालत को संतुलन बनाना होगा। निर्मोही अखाड़े के दावे पर फैसला सुनाते हुए शीर्ष अदालत ने पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा जताया। कोर्ट ने कहा कि इस पर शक नहीं किया जा सकता। साथ ही पुरातत्व विभाग की खोज को नजरअंदाज करना मुश्किल है।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हम शिया वक्फ बोर्ड की विशेष याचिका को खारिज करते हैं। शिया वक्फ बोर्ड ने 1946 में फैजाबाद कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। अदालत ने कहा कि बाबरी मस्जिद मीर बकी ने बनवाई थी। अदालत के लिए धर्मशास्त्र के क्षेत्र में जाना सही नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजस्व रिकॉर्ड में विवादित जमीन सरकारी जमीन के नाम पर दर्ज है।      

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को 51 लाख देगा रामलोक प्रबंधन 

Ayodhya Case Verdict 2019 : situation in himachal on Ayodhya verdict
स्वामी अमरदेव - फोटो : अमर उजाला

अयोध्या पर सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का रामलोक मंदिर प्रबंधन रूड़ा ने स्वागत किया है। मंदिर प्रबंधन ने एलान किया है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए रामलोक मंदिर की तरफ से 51 लाख रुपये की राशि दी जाएगी।

 रामलोक मंदिर के संस्थापक बाबा अमरदेव ने कहा कि अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान को लेकर चल रहा सदियों पुराना विवाद सर्वोच्च न्यायालय ने खत्म कर दिया है।

अब भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा हो सकेगा और रामलला को टेंट में नहीं रहना होगा। बावा अमरदेव ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में रामलोक के भक्तों का भी योगदान रहेगा। 

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