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अटल जी ने छह महीने बर्फ में कैद रहने वाले लाहौलियों को दिखाई थी नई किरण

Fri, 17 Aug 2018 12:02 PM IST
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति) Updated Fri, 17 Aug 2018 12:02 PM IST
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atal bihari vajpayee showed New ray of hope to lahaul

छह महीने तक बर्फ की कैद में अलग-थलग रहने वाले जनजातीय जिले लाहौल स्पीति के बाशिंदों के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2 जून 2000 को रोहतांग सुरंग की नींव डाल कर उम्मीद की नई किरण जगाई थी।

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वाजपेयी ने करीब 18 साल पहले दुनिया की सबसे ऊंचाई से गुजरने वाली रोहतांग टनल की पटकथा लिखी थी। अब टनल बन चुकी है। एक साल बाद यह टनल ट्रैफिक के लिए खुलने जा रही है। लाहौल-स्पीति में आर्थिक क्रांति के नए युग का आगाज होगा। 
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वाजपेयी ने जिला मुख्यालय केलांग के जिस मंच से रोहतांग टनल की घोषणा की थी संयोगवश वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वहां मौजूद थे। उस दौरान मोदी हिमाचल भाजपा के प्रभारी थे। वाजपेयी से लाहौल घाटी के कुछ बुजुर्गों का दोस्ताना संबंध रहा है।
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आरएसएस दौर के लाहौली मित्र टशी उर्फ अर्जुन गोपाल के बुलावे पर प्रधानमंत्री रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने केलांग पहुंच कर 2 जून 2000 में रोहतांग सुरंग निर्माण की आधिकारिक घोषणा कर जनजातीय लोगों को सदी का सबसे बड़ा तोहफा दिया था।

इसके बाद 2002 में वाजपेयी ने मनाली के समीप बाहंग में रोहतांग टनल के साउथ पोर्टल को जानी वाली करीब 14 किमी लंबी धुंधी संपर्क सड़क का शिलान्यास कर सुरंग निर्माण का रास्ता खोला। 

टनल खुलने के बाद जनजातीय इलाका लाहौल-स्पीति समेत चंबा के पांगी, किलाड़ में कृषि, बागवानी, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही पर्यटन के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास की धारा बहेगी। 

1942 में संघ के शिविर में टशी से हुई थी पहली मुलाकात

atal bihari vajpayee showed New ray of hope to lahaul

अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी मित्र रहे स्वर्गीय टशी के छोटे बेटे रामदेव कपूर कहते हैं कि पिता का वाजपेयी के साथ आरएसएस के तृतीय वर्ष प्रशिक्षण के दौरान गुजरात के बडोदरा में 1942 में मुलाकात हुई।

पूरे प्रशिक्षण के दौरान टशी दवा अकेले बुद्धिस्ट थे। लिहाजा उनके नाम और चेहरे को वाजपेयी प्रधानमंत्री बनने तक नहीं भूले। प्रधानमंत्री बनने पर टशी ने वाजपेयी से दिल्ली जा कर कई बार मुलाकात की और रोहतांग टनल निर्माण को लेकर चर्चा की।

टशी के सारथी रहे लाहौल के वयोवृद्ध इतिहासकार छेरिंग दोरजे कहते हैं कि अटल और टशी की दोस्ती कृष्ण और सुदामा जैसी दोस्ती थी। कृषि मंत्री डॉ. मारकंडा ने उस दौरान बतौर राज्य मंत्री वाजपेयी के मंच का संचालन किया था। डॉ. मारकंडा का कहना है कि रोहतांग सुरंग को वाजपेयी ने जनजातीय लोगों के सपने धरातल पर उतारा है।

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