रेहड़ी पर चने और पानीपूरी खाना पसंद करते थे अटल
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी खाने के भी शौकीन रहे हैं। वे प्रीणी में स्थानीय चावल और राजमा को अधिक पसंद करते थे। अटल का 70-80 के दशक से कुल्लू-मनाली में आना-जाना लगा रहा।
जब प्रीणी गांव में अपना आशियाना बनाया तो उनकी आना-जाना भी अधिक हो गया। वे गर्मी की छुट्टियां बिताने अकसर मनाली आते थे। इस दौरान कई बार विश्व विख्यात पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रा और सोलंगनाला का सैरसपाटा भी किया।
खाने के शौकीन अटल रोहतांग दर्रा में रेहड़ी-फड़ी पर चने और पानी पूरी को बड़े चाव के साथ खाते थे। वे जब भी मनाली जाते, बीच रास्ते में जहां भी रेहड़ी नजर आती थी उनकी एंबेसडर कार वहीं खड़ी हो जाती थी। हालांकि, चने और पानीपूरी उनकी पहली पसंद थी। इस दौरान वाजपेयी रेहड़ी में खीरा और मक्की का भी स्वाद चखा करते थे।
देवकारज में शामिल होते थे अटल
अटल एंबेसडर कार में ही अकसर रोहतांग, मनाली और सोलंगनाला जाते थे। पूर्व प्रधान कुंदन लाल ने कहा कि अटल के खाना पूरी तरह सादा होता था। स्थानीय राजमा के साथ वे चक्की का आटा अधिक पसंद करते थे। शादी समारोह में आम लोगों के बीच बैठकर खाना खाते थे।
अटल बिहारी वाजपेयी घाटी के देवी-देवताओं पर अटूट विश्वास रखते थे। घाटी में जहां भी कोई देव कारज या शादी विवाह हो इसमें शामिल होते थे। स्थानीय लोगों से घुल-मिल जाते थे।