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सादगी की मिसाल थे अटल, जमीन पर बिस्तर लगाकर सोते थे

Sat, 18 Aug 2018 06:00 AM IST
रोशन ठाकुर, अमर उजाला, कुल्लू
रोशन ठाकुर, अमर उजाला, कुल्लू Updated Sat, 18 Aug 2018 06:00 AM IST
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atal bihari vajpayee great memories during his kullu stay

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी नेता और कवि होने के साथ सादगी की मिसाल थे। वे प्रीणी स्थित अपने घर में किसी वीवीआईपी की तरह नहीं रहते थे। जमीन पर बिस्तर लगाकर सोते थे। उनकी इस सादगी का हर कोई कायल था।

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प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वाजपेयी का कुल्लू-मनाली खासकर अपने घर प्रीणी आना-जाना रहता था। ऊझी घाटी की पंचायतों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने आया था। तत्कालीन उपायुक्त आरडी नजीम, बीडीओ और गोपाल कृष्ण शर्मा खड़े थे तो अटल ने कुर्सी लाकर बैठने को कहा था।
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तत्कालीन प्रधान संघ के प्रधान देंवेद्र नेगी ने कहा कि उनसे मिलने के लिए सुबह-शाम वीआईपी, प्रतिनिधिमंडल तथा आम लोगों का तांता लगा रहता था। कड़ी सुरक्षा होने पर भी आम लोग उनसे आसानी से मिल सकते थे।
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जो भी उनसे मिलने आता था वे उसका खुले दिल से स्वागत करते थे। अटल जब भी प्रीणी आते दोस्तों के घर पर भोजन करने जरूर जाते थे। कहते थे कि कोई मिलने के लिए आया है तो वे भी मिल लें, क्योंकि वे भी मनालीवासी हैं।


 

मनाली से दस दिन तक चलाई थी सरकार 

atal bihari vajpayee great memories during his kullu stay

कोई भी मुझसे मिले बगैर निराश न हो, मैं सबको सुनना चाहता हूं। बच्चों, महिलाओं से लेकर बुजुर्गों तक सबका ख्याल रखते थे। पूर्व प्रधानमंत्री मनाली आते थे तो वे घाटी की हसीन वादियों के बीच मौन साधना में लीन रहते थे।

इस दौरान अटल प्रीणी स्थित अपने घर के आंगन और सेब बगीचों में चहलकदमी कर घाटी की वादियों को निहारते थे। मौन साधना के दौरान अपने कर्मचारियों के साथ इशारों से बात करते थे।  

पूर्व सांसद महेश्वर सिंह कहते हैं कि अटल कभी भी कुल्लू के परिधि गृह में नहीं रहे। वे मौहल या मनाली में रहते थे। यहां उन्हें काफी सुुकून मिलता था। वे शांत वादियों में कविताएं लिखते थे।

मौहल में ब्यास किनारे भी कई कविताएं लिख चुके हैं। वाजपेयी जब मनाली में थे तो उस समय उन्होंने करीब दस दिन तक यहां से सरकार चलाई थी।  

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