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कसौली गोलीकांडः जिम्मेदार अफसरों, मूकदर्शक पुलिस पर अब तक कार्रवाई नहीं

Thu, 03 May 2018 09:47 AM IST
संतोष कुमार, अमर उजाला, सोलन
संतोष कुमार, अमर उजाला, सोलन Updated Thu, 03 May 2018 09:47 AM IST
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 assistant town planner murder case, No action on the Mute police yet

कसौली गोलीकांड के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। कसौली गोलीकांड के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और मौके पर मूकदर्शक बनी रही पुलिस पर अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। 

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इस मामले में सुर्प्रीम कोर्ट तक ने संज्ञान ले लिया है लेकिन कार्रवाई के नाम पर सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया। घटना के दूसरे दिन सरकार ने सिर्फ जांच बैठाई है। 
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बीते मंगलवार को अवैध निर्माण गिराने के लिए जिला प्रशासन की ओर से गठित चार टीमों के साथ करीब चार दर्जन पुलिस कर्मी मौजूद थे। सुरक्षा बल के बीच गोलियां दागना और एक अधिकारी की मौत होना, आरोपी का आसानी से बचकर निकलना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
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अब चाहे पुलिस अपनी साख बचाने के लिए इनाम देने की घोषणा कर रही है लेकिन पुलिस मुस्तैद होती तो यह वारदात टल सकती थी।  एसपी सोलन मोहित चावला कहते हैं कि आधा दर्जन टीमें आरोपी की तलाश में जुटी हुई हैं। 

ये है सबसे बड़ा सवाल

 assistant town planner murder case, No action on the Mute police yet

जितनी फोर्स आरोपी को ढूंढने के लिए लगाई जानी चाहिए, उतनी लगा दी गई हैं। उन्होंने दावा किया कि आरोपी जल्द ही सलाखों के पीछे होगा। उपायुक्त सोलन विनोद कुमार ने कहा कि इस मामले की पूरी जांच संबंधित अथॉरिटी कर रही है।

जिला प्रशासन माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार 13 होटलों व गेस्ट हाउसों का अवैध निर्माण तुड़वा रहा है। माना जा रहा है कि आरोपी पहले से ही वारदात को अंजाम देने का मन बनाकर आया था।

इसीलिए वह अपने साथ पिस्तौल लेकर मौके पर मौजूद था। बड़ा सवाल यह है कि जब उसने बंदूक तानी और तीन राउंड फायर किए तो जवाब में पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की। क्या पुलिस उस पर गोली नहीं चला सकती थी। इतने अधिकारी मौजूद होने के बावजूद पुलिस गोली चलाने से क्यों कतरा गई। 

अफसरों पर पहले भी हो चुके हैं हमले 

 assistant town planner murder case, No action on the Mute police yet

जिला में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान पहले भी अधिकारियों पर हमले हो चुके हैं लेकिन कसौली प्रकरण में महिला अधिकारी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। ताता कसौली गोलीकांड से अधिकारी अपनी सुरक्षा को लेकर खासे चिंतित हैं। 

केस-1
7 अगस्त, 2013 को सैणीमाजरा के समीप सरसा नदी में खनन पर कार्रवाई के दौरान  तत्कालीन आईएएस अधिकारी एसडीएम नालागढ़ डा. यूनुस पर हमला हुआ था। हमले के बाद धारा 279, 336, 353 के तहत केस दर्ज हुआ और बाद में धारा 307 लगाई गई। ग्रामीणों के विरोध और पुलिस की जांच के बाद धारा 307 हटाई गई और न्यायिक हिरासत में चल रहे मक्खन को बेल मिली थी। 

केस-2
एसडीएम पर हमले के 21 दिन बाद मानपुरा में नदी की ओर जा रहे तत्कालीन एसपी बद्दी एस अरूल कुमार की गाड़ी के काफिले को दो ट्रैक्टरों ने रोक दिया। एसपी को सूचना थी कि नदी में खनन हो रहा है, लेकिन वह नदी तक पहुंच ही नहीं पाए थे।

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