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विधानसभा शीत सत्र: जगत सिंह नेगी बोले- विधायकों के प्रतीक के रूप में दोबारा लौटाई जाए झंडी

Tue, 14 Dec 2021 10:23 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 14 Dec 2021 10:23 PM IST
सार

विधायक जगत सिंह नेगी नेकहा कि पुराने समय में जो राजा-महाराजों का माहौल होता था, उसी तरह आज हर जिले में कलेक्टर का माहौल है। आज विधायकों को अपना काम करवाने के लिए डीसी कार्यालय में लाइनों में लगना पड़ता है। उन्होंने कहा कि आज विधायकों के पास इतनी ताकत नहीं है कि वे जनता की समस्या का हल आसानी से कर सकें। 

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Assembly winter session: Jagat Singh Negi said - the flag should be returned as a symbol of MLAs
कांग्रेस के विधायक जगत सिंह नेगी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधायकों के प्रतीक के रूप में दोबारा झंडी लौटाई जाए। यह मांग कांग्रेस के विधायक जगत सिंह नेगी ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष रखी। उन्होंने कहा कि आज एक जिला परिषद अध्यक्ष, सेशन जज, वाइस चांसलर्स के पास भी झंडी है तो विधायकों को झंडी देने में क्या दिक्कत है। इसमें कौन सा सरकार का पैसा खर्च होगा। उन्होंने कहा कि पुराने समय में जो राजा-महाराजों का माहौल होता था, उसी तरह आज हर जिले में कलेक्टर का माहौल है। आज विधायकों को अपना काम करवाने के लिए डीसी कार्यालय में लाइनों में लगना पड़ता है।

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उन्होंने कहा कि आज विधायकों के पास इतनी ताकत नहीं है कि वे जनता की समस्या का हल आसानी से कर सकें। उन्होंने प्रदेश में कलेक्टरी सिस्टम को खत्म करने की मांग की है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार से मांग की है कि विधानसभा समितियों की बैठकों की सारी रिकॉर्डिंग की जाए। उन्होंने कहा कि विधायकों के पास कोई कार्यालय नहीं है, जिस कारण लोग अपनी समस्या लेकर उनके घर तक पहुंच जाते हैं। उन्होंने अध्यक्ष से मांग की है कि विधायक के सब डिविजन में रेस्ट हाउस में एक-एक सैट ऑफिस के रूप में निर्मित किया जाए। जहां विधायक अपने क्षेत्र के लोगों की समस्या सुन सके।

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बिल पर हां और ना के फेर में फंसे विधायक 

 शीतकालीन सत्र के चौथे दिन सदन में सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी (स्थापना और विनियमन) विधेयक 2021 चर्चा के लिए रखा गया। इस दौरान विधायक राकेश सिंघा की ओर से बिल में बताए गए 30 संशोधन शोर-शराबे के बीच निरस्त हो गए। कांग्रेस, भाजपा और किसी भी निर्दलीय विधायक ने बिल में संशोधन के लिए अनुमोदन नहीं किया था।

चर्चा के बाद विधानसभा अध्यक्ष विपिन परमार ने सदन से पूछा कि जो सदस्य बिल में राकेश सिंघा की ओर से अनुमोदित किए गए संशोधनों को स्वीकार करने के पक्ष में हैं, वह हां कहें और जो सहमत नहीं हैं, वह न कहें। इस पर सत्ता पक्ष के विधायक हां और ना के फेर में फंस गए। इस पर विपक्ष और प्रेस गैलरी की ओर से खूब ठहाके लगे।

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