Himachal News: पर्यटन परियोजनाओं के लिए एडीबी ने दी 1311.20 करोड़ की सैद्धांतिक मंजूरी
सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि श्री बाबा बालकनाथ मंदिर दियोटसिद्ध में पर्यटकों को सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा अटल टनल रोहतांग के दोनों ओर पर्यटन आधारित गतिविधियों का विकास किया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश में पर्यटन परियोजनाओं को विकसित करने के लिए एशियन विकास बैंक (एडीबी) ने 1311.20 करोड़ रुपये की सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। यह जानकारी मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को शिमला में बयान जारी करते हुए दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें एडीबी परियोजना की ट्रेंच-1 की कई उप परियोजनाएं शामिल हैं, जिनका विकास किया जाना है। इस परियोजना के तहत नादौन में राफ्टिंग और वाटर पार्क परिसर, पौंग डैम, तत्तापानी, नादौन और बंगाणा आदि स्थानों में जलक्रीड़ा उपकरण, जैटी, शिकारा, हाउस बोट और बाइकिंग रूट सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार साहसिक, धार्मिक, ग्रामीण और सप्ताहांत पर्यटन को प्रोत्साहित कर रही है। बेहतर हवाई सुविधा उपलब्ध करवाने की दिशा में भी योजनाबद्ध कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एशियन विकास बैंक ने प्रदेश सरकार की पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने की परिकल्पना की सराहना की है। प्रदेश में पर्यटन अधोसंरचना विकसित करने के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं तैयार की गई हैं।
इस परियोजना के ट्रेंच-1 में पालमपुर शहर का सौंदर्यीकरण, धर्मशाला में सम्मेलन केंद्र, मंडी में शिवधाम का विकास, परागपुर में ग्रीन पार्क, धर्मशाला, मनाली और शिमला में आइस स्केटिंग रिंक और रोलर स्केटिंग रिंक का निर्माण किया जाना है। इसके अलावा शिमला, धर्मशाला, नादौन, मनाली और कुल्लू में वेलनेस केंद्र बनाए जाने हैं। धर्मशाला में उच्च गुणवत्तायुक्त फव्वारे, टूरिस्ट सुविधा और मंडी-कुल्लू राष्ट्रीय राजमार्ग, नादौन और कालेश्वर महादेव कांगड़ा में सड़क किनारे कई सुविधाएं भी मिलेंगी।
बाबा बालकनाथ मंदिर और अटल टनल के दोनों ओर बढ़ेंगी पर्यटन गतिविधियां
सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि श्री बाबा बालकनाथ मंदिर दियोटसिद्ध में पर्यटकों को सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा अटल टनल रोहतांग के दोनों ओर पर्यटन आधारित गतिविधियों का विकास किया जाएगा। पर्यटन को बढ़ावा देने, विपणन, प्रचार-प्रसार और पर्यटन विकास में स्थानीय समुदायों की क्षमता निर्माण के लिए भी प्रावधान हैं।
पर्यटकों को होम स्टे में ठहर कर राज्य के अनछुए प्राकृतिक स्थलों पर समय बिताने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। राज्य के पारंपरिक व्यंजनों और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए खाद्य एवं सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि पर्यटक भी हिमाचल की विविध संस्कृति एवं हस्तकलाओं से लाभान्वित हो सकें।