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कोरोना मरीजों के लिए ले सकते हैं सेना, अर्धसैनिक बलों की एंबुलेंस

Fri, 14 May 2021 10:51 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 14 May 2021 10:51 PM IST
सार

स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने कहा कि जिन मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं है या ठीक हो चुके मरीजों को वाहन सुविधा प्रदान करने के लिए नॉन एंबुलेंस वाहनों का उपयोग किया जा सकता है। 

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Army, paramilitary forces can take ambulance for corona patients
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश सरकार ने जिला प्रशासन, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपलों, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षकों और सीएमओ को कोरोना मरीजों की सुविधा के लिए 108 और 102 एंबुलेंस सेवा को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कोविड-19 मरीजों की वाहन सुविधा के लिए सेना, अर्धसैनिक बल, ईएसआई, जल विद्युत परियोजनाओं में उपयोग किए जा रहे वाहनों की संभावित उपलब्धता तलाशने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी के लिए 108 और छोटी दूरी के लिए 102 एंबुलेंस का उपयोग करें। 102 में छोटे ऑक्सीजन सिलिंडर होते हैं। उन्होंने कहा कि जिन मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं है या ठीक हो चुके मरीजों को वाहन सुविधा प्रदान करने के लिए नॉन एंबुलेंस वाहनों का उपयोग किया जा सकता है। 

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पहली डोज लगवाने के 12 से 16 सप्ताह बाद लगेगी दूसरी डोज 
 केंद्र सरकार के परामर्श के बाद कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड लगाने के लिए पहली व दूसरी डोज के बीच के समय को बढ़ाया गया है। कोविशील्ड वैक्सीन की दूसरी डोज, पहली डोज के 12 से 16 सप्ताह बाद लाभार्थी को दी जाएगी। राज्य में कोविन पोर्टल पर इस संबंध में आवश्यक परिवर्तन शीघ्र किया जाएगा।  
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कोविड मरीजों के लिए आयुष घर द्वार वेलनेस कार्यक्रम 
आयुष विभाग ने आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के सहयोग से कोरोना मरीजों के लिए आयुष घर द्वार वेलनेस कार्यक्रम को शुरू किया है। इस कार्यक्रम का लाभ लगभग 30 हजार मरीजों को मिलेगा, जो कोविड संक्रमण के कारण विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों व होम आइसोलेशन में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मरीजों की रिकवरी दर को बढ़ाना, जीवन स्तर में सुधार करना, समान स्वास्थ्य देखभाल सुविधा और बीमारी से उभरने के बाद पुनर्वास सुनिश्चित करना है। जूम, व्हाटसएप जैसे सोशल मीडिया मंच पर लगभग एक हजार वर्चुअल समूह बनाए जाएंगे। प्रत्येक समूह में 20 से 30 मरीज व एक एएमओ, आयुर्वेदिक, पैरामेडिकल स्टाफ, नोडल अधिकारी और एक प्रशिक्षित प्रशिक्षक, आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयं सेवक शामिल होंगे।

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