बीपी और गठिया में फायदेमंद होगा सेब का सिरका, नौणी विवि ने नई तकनीक से हासिल की सफलता
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हिमाचल के डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में विकसित सेब का सिरका जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगा। नवीनतम तकनीक से बना यह सिरका रक्तचाप से लेकर गठिया के रोग में लाभदायक होगा। सेब के इस सिरके का उत्पादन जुब्बल के नंदपुर स्थित कंपनी हिली फूड्स करेगी। विवि का कंपनी के साथ उत्पादन को लेकर करार हुआ है। सेब के इस सिरके को विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति डॉ. परविंदर कौशल ने लॉन्च किया। लॉन्चिंग के दौरान उद्यमी और हिली फूड्स के संस्थापक बीएस रावत समेत निदेशक अनुसंधान डॉ. राकेश गुप्ता, डीन बागवानी महाविद्यालय डॉ. एमएल भारद्वाज, लाइब्रेरियन डॉ. डीडी शर्मा, खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी की विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू धीमान और वैज्ञानिक डॉ. राकेश शर्मा भी मौजूद रहे।
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. राकेश शर्मा और डॉ. वीके जोशी ने डीएसटी प्रायोजित परियोजना के तहत इस प्रौद्योगिकी को परंपरागत तरीकों की जगह पर एक तेज और प्रभावी विकल्प के रूप में विकसित किया है। यह तकनीक बाजार में न बिकने वाले खराब क्वालिटी सेब से सिरके के उत्पादन में मददगार होगी। इससे सबे उत्पादकों की आजीविका में सुधार लाने का एक बेहतर विकल्प भी तैयार होगा। विवि के वैज्ञानिकों ने लगभग पांच वर्षों के शोध में सिरके और बेस वाइन के उत्पादन में पेश आने वाली समस्याओं का समाधान किया है। व्यापक शोध कार्य के बाद एक संशोधित प्रक्रिया विकसित कर कम समय में गुणवत्ता वाले सिरके के उत्पादन में विवि को सफलता मिली है। कुलपति डॉ. परविंदर कौशल ने वैज्ञानिकों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रौद्योगिकी से सेब बागवानों की आर्थिकी में क्रांति आएगी।
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दुनिया भर में सिरके का उपयोग स्वाद और खाद्य संरक्षण के लिए किया जाता है। विभिन्न प्रकार के नॉन सिंथेटिक सिरकों में सेब का सिरका भी शामिल है। कई देशों में इसका इस्तेमाल होता है। औषधीय गुणों और गठिया, अस्थमा, खांसी, उच्च ब्लड शूगर, उच्च कोलेस्ट्रॉल आदि बीमारियों में बेहद लाभदायक होने के कारण सेब के सिरके की मांग में लगातार वृद्धि हो रही है।