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बीएससी पूरी कर शुरू की बागवानी, अब लाखों की कमाई
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शिमला में फल मंडी में सेब की आमद में बढ़ोतरी हुई है। अच्छा सेब तीन हजार रुपये पेटी तक बिक रहा है। भ?
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बीएससी पूरी कर शुरू की बागवानी, अब लाखों की कमाई
शिमला। पढ़ाई पूरी करने के बाद युवा जहां इंजीनियरिंग और दूसरे प्रोफेशनल कोर्स करने बाहरी राज्यों का रुख करते हैं वहीं कोटखाई के पांदली गांव के मुकेश चौहान ने बागवानी को बतौर स्वरोजगार चुना। बीएससी की पढ़ाई करने के बाद मुकेश ने बागवानी करने की ठानी और उनका यह फैसला आज सही साबित हो रहा है। मुकेश बागवानी से अब लाखों रुपये की कमाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्होंने अपने बगीचे से निकली सेब की पहली खेप ही डेढ़ लाख रुपये में बेची है।
मुकेश चौहान सेब की स्कारलेट-2 स्पर किस्म की पैदावार कर रहे हैं। चौहान का दावा है कि वह इस किस्म को उगाने वाले पहले बागवान हैं। भट्ठाकुफर फल मंडी में वीरवार को 51 पेटी स्कारलेट-2 स्पर सेब का पहला लॉट मुकेश चौहान ही लाया। इसकी बोली दो हजार रुपये से शुरू हुई और तीन हजार रुपये प्रति पेटी सेब बिका। इस किस्म के सेब खरीदने के लिए यहां व्यापारियों का जमघट लगा रहा। दिल्ली के व्यापारी ने इस सेब को प्रति पेटी तीन हजार रुपये का रेट दिया। मुकेश चौहान ने एक साल पहले इस किस्म के सेब को अपने बगीचे में लगाया था। एक साल में ही यह पौधा फल देने लग गया। 27 साल के मुकेश चौहान का कहना है कि छोटे बागवान भी इससे अच्छी आमदनी कमा सकते हैं। मुकेश चौहान ने अपने बगीचे में करीब 400 पौधे लगाए हैं और अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। मुकेश चौहान ने बताया कि अभी बागवानों ने स्कारलेट-2 स्पर लगाना ही शुरू किया है। मुकेश चौहान बचपन से सेब की किस्मों में रुचि रखते थे। ऐसे में इन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर सेब में भविष्य बनाने का फैसला लिया था। पहली ही फसल से इनको अच्छे परिणाम मिलने लगे हैं। कहा कि इससे वह बहुत खुश हैं।
कम जगह में लगाया जा सकते हैं पौधे
बागवान मुकेश चौहान ने बताया कि स्कारलेट-2 स्पर सेब की सबसे अच्छी किस्म मानी जाती है। यह बागवानों को दो साल के बाद फसल देना शुरू कर देता है। इस किस्म का पेड़ करीब दो से तीन मीटर का होता है। इन्हें दो फीट की दूरी पर ही लगाया जा सकता है। स्कारलेट-2 किस्म का एक पेड़ से एक पेटी सेब निकल जाती है। इसका एक पौधा तीन सौ रुपये में वह चंडीगढ़ से लाए थे। यह एक से डेढ़ साल में पैदावार देना शुरू कर देता है। इस किस्म में सेब का साइज भी सही बनता है।
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शिमला। पढ़ाई पूरी करने के बाद युवा जहां इंजीनियरिंग और दूसरे प्रोफेशनल कोर्स करने बाहरी राज्यों का रुख करते हैं वहीं कोटखाई के पांदली गांव के मुकेश चौहान ने बागवानी को बतौर स्वरोजगार चुना। बीएससी की पढ़ाई करने के बाद मुकेश ने बागवानी करने की ठानी और उनका यह फैसला आज सही साबित हो रहा है। मुकेश बागवानी से अब लाखों रुपये की कमाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उन्होंने अपने बगीचे से निकली सेब की पहली खेप ही डेढ़ लाख रुपये में बेची है।
मुकेश चौहान सेब की स्कारलेट-2 स्पर किस्म की पैदावार कर रहे हैं। चौहान का दावा है कि वह इस किस्म को उगाने वाले पहले बागवान हैं। भट्ठाकुफर फल मंडी में वीरवार को 51 पेटी स्कारलेट-2 स्पर सेब का पहला लॉट मुकेश चौहान ही लाया। इसकी बोली दो हजार रुपये से शुरू हुई और तीन हजार रुपये प्रति पेटी सेब बिका। इस किस्म के सेब खरीदने के लिए यहां व्यापारियों का जमघट लगा रहा। दिल्ली के व्यापारी ने इस सेब को प्रति पेटी तीन हजार रुपये का रेट दिया। मुकेश चौहान ने एक साल पहले इस किस्म के सेब को अपने बगीचे में लगाया था। एक साल में ही यह पौधा फल देने लग गया। 27 साल के मुकेश चौहान का कहना है कि छोटे बागवान भी इससे अच्छी आमदनी कमा सकते हैं। मुकेश चौहान ने अपने बगीचे में करीब 400 पौधे लगाए हैं और अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। मुकेश चौहान ने बताया कि अभी बागवानों ने स्कारलेट-2 स्पर लगाना ही शुरू किया है। मुकेश चौहान बचपन से सेब की किस्मों में रुचि रखते थे। ऐसे में इन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी कर सेब में भविष्य बनाने का फैसला लिया था। पहली ही फसल से इनको अच्छे परिणाम मिलने लगे हैं। कहा कि इससे वह बहुत खुश हैं।
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कम जगह में लगाया जा सकते हैं पौधे
बागवान मुकेश चौहान ने बताया कि स्कारलेट-2 स्पर सेब की सबसे अच्छी किस्म मानी जाती है। यह बागवानों को दो साल के बाद फसल देना शुरू कर देता है। इस किस्म का पेड़ करीब दो से तीन मीटर का होता है। इन्हें दो फीट की दूरी पर ही लगाया जा सकता है। स्कारलेट-2 किस्म का एक पेड़ से एक पेटी सेब निकल जाती है। इसका एक पौधा तीन सौ रुपये में वह चंडीगढ़ से लाए थे। यह एक से डेढ़ साल में पैदावार देना शुरू कर देता है। इस किस्म में सेब का साइज भी सही बनता है।
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