कोरोना काल में हजारों लोगों को रोजगार देगा सेब सीजन, रिकांगपिओ में कोल्ड स्टोर निर्माण कार्य शुरू
सेब कारोबार से सूबे में करीब 14 लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। इस साल भी कोरोना के बीच सेब सीजन में हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
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बगीचों में सेब के फल अब अखरोट से थोड़ा बड़ा आकार ले चुके हैं। कई बगीचों में अर्ली वैरायटी में रंग आने का क्रम शुरू हो गया है। कुल्लू जिले के अलावा शिमला, मंडी के कई क्षेत्रों समेत किन्नौर में सेब का अच्छा उत्पादन होता है। सेब सीजन के दौरान सूबे में हजारों लोगों को पांच माह तक रोजगार मिलता है। इस साल भी कोरोना के बीच सेब सीजन में हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
ऐसे में जिला समेत सूबे में सीजन के दौरान बगीचों से लेकर मंडियों तक रोजगार खुलेगा। सेब कारोबार से सूबे में करीब 14 लाख लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, लेकिन खराब मौसम के चलते इस बार फसल उम्मीद से कम होगी। हालांकि बागवानों को कोरोना काल में फसल के अच्छे दाम मिलने की आस है। जिला कुल्लू में शुरुआती दौर में अनुमान था कि सेब की 75 लाख पेटियों का उत्पादन होगा। बारिश-बर्फबारी, ओलावृष्टि और अंधड़ के कारण उत्पादन में गिरावट की आशंका है।
इस बार प्रदेश में सेब की तीन करोड़ पेटी के उत्पादन का अनुमान था, लेकिन अब खराब मौसम की वजह से उत्पादन घटेगा। मंडियों में आढ़तियों से लेकर ट्रक और अन्य छोटे मालवाहक ऑपरेटरों को सेब सीजन का बेसब्री से इंतजार रहता है। सेब सीजन के दौरान मजदूरों को दिहाड़ी भी अन्य दिनों से अधिक मिलती है। तुड़ान और भराई करने वालों से लेकर ट्रक, जीप ऑपरेटरों की आय में इजाफा होने की उम्मीद होती है। सीजन में सेब उत्पादकों से लेकर श्रमिक और सड़कों तक माल पहुंचाने वाले खचर मालिक, ढाबा वाले, बाहरी राज्यों से आए आढ़ती और लदानी शामिल होते हैं। (संवाद)
बर्फबारी, ओलावृष्टि ने पहुंचाया नुकसान
बागवानी विभाग के उपनिदेशक विद्या प्रकाश बैंस ने कहा कि इस साल आरंभ में उम्मीद की जा रही थी कि सेब की फसल अच्छी होगी। अप्रैल की बर्फबारी, ओलावृष्टि और अंधड़ ने फसल को बड़ी क्षति पहुंचाई। इससे उत्पादन में गिरावट आएगी।
किन्नौर के रिकांगपिओ में कोल्ड स्टोर का काम अवार्ड
जनजातीय जिले किन्नौर में पहले सीए स्टोर का निर्माण कार्य सरकार ने अवार्ड कर दिया है। सीए स्टोर का निर्माण कार्य आरंभ कर दिया है। इस प्रोजेक्ट पर राज्य सरकार करीब साढ़े 14 करोड़ की राशि व्यय करेगी। चयनित भूमि की स्ट्राटा ने जांच शुरू कर दी है। ताकि पता लगाया जा सके कि भविष्य में निर्माण करते समय किसी प्रकार को कोई परेशानी का सामना न करना पड़े। भूमि की जांच करने बाद ही यह तय होगा कि सीए स्टोर का निर्माण किस तरीके से किया जाना है।
किन्नौर जिले के आसपास के क्षेत्रों के बागवानों को 5600 मीट्रिक टन क्षमता का सेब भंडारण के लिए आधुनिक मशीनों से लैस कोल्ड स्टोर मिलेगा। अभी जिले में ऐसा कोई सीए स्टोर उपलब्ध नहीं है। जहां जिले के बागवान अपने सेब को भंडारित कर सकें। जनजातीय क्षेत्र के बागवानों को अपना पूरा सेब देश की मंडियों में बेचना मजबूरी रहती है। सीए स्टोर तैयार होता है तो वहां पर सीजन में सेब भंडारण कर ऑफ सीजन में अच्छे दामों पर बेचा जा सकेगा।
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एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल ने कहा कि किन्नौर के रिकांगपिओ में सीए स्टोर का काम अवार्ड कर दिया है। जिस जमीन में प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। इसकी जांच का काम स्ट्राटा की ओर से किया जा रहा है।